मुंबई में बहुप्रतीक्षित मेट्रो रेल चलने से पहले ही विवादों में घिर गई है। मुंबई मेट्रो रेल के सीईओ अभय मिश्र ने ज्यों ही यह घोषणा की कि रविवार से वर्सोवा- अंधेरी- घाटकोपर के बीच मेट्रो रेल चलेगी, तुरंत राजनीति शुरू हो गई।
पहले उद्घाटन को लेकर श्रेय लेने की होड़ मची और उसके बाद टिकट दर को लेकर मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भाजपा पर हमला बोल दिया। इससे मुंबई में राजनीति गरमा गई है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि भाजपा मेट्रो रेल टिकट दर के मुद्दे पर रिलायंस कंपनी को शह दे रही है। हालांकि भाजपा ने इस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया है।
किसी भी सूरत में नहीं लेने देंगे ज्यादा किराया
मुख्यमंत्री चव्हाण का कहना है कि निविदा में 9, 11 और 13 रुपये टिकट दर प्रस्तावित किया गया है, जबकि रिलायंस 10, 20 और 30 रुपये तक टिकट दर वसूलने की फिराक में है।
चव्हाण ने कहा है कि टिकट दर के संबंध में सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की है। सरकार किसी भी परिस्थिति में टिकट दर वृद्धि नहीं होने देगी।
इस बीच भाजपा सांसद किरीट सोमैया और गोपाल शेट्टी ने शनिवार को ही इसका उद्घाटन करने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
मिल पाएगा मेट्रो रेल का फायदा मिलेगा?
मुंबई में करीब 10 बार मेट्रो रेल की डेडलाइन फेल हो चुकी है लेकिन जब मुंबईवासियों को मेट्रो में सफर करने का सपना पूरा होने का समय आया तो राजनीतिक विवाद पैदा हो गया है।
वर्सोवा-अंधेरी और घाटकोपर के बीच मेट्रो रेल के 11 स्टेशन आएंगे और ट्रैफिक की समस्या से जूझ रहे मुंबईवासी यह सफर सिर्फ 20 मिनट में तय कर सकेंगे।
दरअसल, दिल्ली मेट्रो रेल में सरकारी भागीदारी है जबकि मुंबई में मेट्रो रेल चलाने का ठेका रिलायंस कंपनी ने लिया है। मुंबई मेट्रो रेल परियोजना तीन साल में पूरी होनी थी, जिसकी लागत 2356 रुपये प्रस्तावित थी लेकिन इसमें 10 साल का समय लग गया।