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मोदी सरकार के 100 दिन: ये रही विवादों की फेहरिस्त

Thu, 04 Sep 2014 11:21 AM IST
वरुण कुमार/अमर उजाला, टीम डिजिटल
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मोदी सरकार के 100 दिन पूरे हो गए। बीजेपी इन सौ दिनों की उपलब्धियां गिना रही है और विरोधी पार्टियां सरकार की नाकामियां लेकिन इन 100 दिनों में विवादों ने सरकार की पीछा नहीं छोड़ा।
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एक के बाद एक विवाद सरकार के पीछे लगे रहे, विरोधी पार्टियों ने सरकार को घेरने के तमाम जतन भी किए लेकिन प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई सरकार निश्चिंत है।

विवादों के घेरे में सत्तारूढ़ पार्टी के कई नेता भी हैं और सरकार के कुछ मंत्री भी। आइए आगे की स्लाइडों में नज़र डालते हैं ऐसे ही कुछ विवादों पर।

क्या बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा?

भारतीय जनता पार्टी में क्या सब कुछ ठीक चल रहा है? ये सवाल आजकल सियासी गलियारों में तैर रहा है। माना जा रहा है कि आडवाणी के बाद मुरली मनोहर जोशी को भी धीरे से किनारे लगा दिया गया है।

आडवाणी, जोशी और अन्य बुजुर्ग नेताओं को साइडलाइन करने पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि,"वे मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे।"

पार्टी अध्यक्ष मोदी के खासमखास अमित शाह को बना दिया गया है और योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं भी भूमिका भी बढ़ा दी गई है। कल्याण सिंह जैसे नेता जिन्होंने मोदी का समर्थन किया उन्हें कोई ना कोई 'गिफ्ट' दे दिया गया है।

इस विवाद के सामने आने के बाद से बीजेपी के बड़े नेता या तो इस पर बोलने से बच रहे हैं या फिर कोई नपा तुला जवाब देकर इतिश्री कर रहे हैं।

नेता विपक्ष के पद पर विवाद

मोदी सरकार बनने के बाद एक और चीज या यूं कहें कि विवाद काफी चर्चा में रहा। मामला था नेता विपक्ष के पद का। मोदी एक ऐसी सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं जिसके सामने विपक्ष का नेता ही नहीं है।

लोकसभा में नेता विपक्ष के पद के लिए राजनीतिक दल के पास कम से कम 55 सीटें होनी चाहिए लेकिन कांग्रेस के पास चूंकि 44 सीटें हैं इसलिए कांग्रेस को नेता विपक्ष का पद देने से लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने इंकार कर दिया।

मामला इतना बढ़ा कि सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सरकार से जवाब तलब भी किया गया और कुछ मोहलत भी दी गई। अभी तक भी ये मामला चर्चा में है और मोदी सरकार के दामन से चिपका हुआ है।

हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान पर विवाद

इन दिनों एक ताजा विवाद सुर्खियों में है। ये विवाद है चंद बयानों पर जिनमें हिंदू राष्ट्र की बात कही गई है। विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हिंदुस्तान में रहने वाले सभी हिंदू हैं।

बीजेपी की वरिष्ठ नेता नजपा हेपतुल्ला ने भी भागवत के सुर में सुर मिलाते हुए एक बयान दे दिया। हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि,"मैंने हिंदू नहीं हिंदी कहा था।"

कांग्रेस नेताओं ने इस विवाद के तुरंत बाद मोर्चा संभाल लिया और मोदी सरकार समेत भागवत, नजमा पर निशाना साधने लगे। मनीष तिवारी ने ट्वीट किया कि,"उन्हें संविधान पढ़ना चाहिए, उन्हें देखना चाहिए कि वहां भारत की क्या परिभाषा दी गई है।"

तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा: राजनाथ सिंह

देश के गृहमंत्री और सरकार में नंबर दो माने जाने वाले राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह के दामन पर भी एक विवाद का दाग लग गया है। पंकज सिंह पर पुलिस अधिकारी से पैसा लेने का आरोप लगा और मीडिया में खबरें आईं कि पीएम ने पंकज को फटकार लगाई है।

राजनाथ सिंह इन खबरों से इतने आहत हुए कि राजनीति छोड़ने की बात तक कह डाली। उन्होंने कहा कि,"मेरे परिवार पर लगे तमाम आरोप बेबुनियाद हैं और अगर ये साबित होते हैं तो मैं राजनीति से सन्यास ले लूंगा।"

विवाद बड़ा था और इससे राजनाथ सिंह का नाम भी जुड़ा था। अभी तक भी इस पूरे विवाद से पर्दा तो नहीं उठ पाया है लेकिन इस विवाद के कारण राजनाथ के पुत्र पंकज सिंह के राजनीतिक करियर पर ब्रेक तो लग ही गया है।

हूटिंग विवाद

एक और विवाद इन दिनों सरकार के पीछे है। विवाद गैर भाजपाई मुख्यमंत्रियों की हूटिंग का है। मोदी के मंच पर गैर भाजपाई सरकारों और उनके सीएम की मोदी समर्थकों द्वारा हूटिंग की गई लेकिन मोदी खामोश रहे।

मोदी वहां-वहां गए जहां आने वाले वक्त में चुनाव होने हैं, वहां के सीएम के साथ उन्होंने मंच साझा किया लेकिन उनके समर्थकों ने स्थानीय सीएम को विरोध में नारे लगाए।

हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की हूटिंग हुई, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की हूटिंग हुई और इससे सचेत महाराष्ट्र ने सीएम पृथ्वीराज चव्हाण ने मोदी के साथ मंच साझा करने से तौबा कर ली।

मंत्रियों के बेतुके बयानों से उपजे विवाद

मोदी सरकार में मंत्री अरुण जेटली ने बयान दिया कि,"दिल्ली में हुई बलात्कार की छोटी सी घटना के कारण पर्यटन को करोड़ों का नुकसान पहुंचता है।"

डॉक्टर हर्षवर्धन के तो दो बयानों पर घमासान मचा। उन्होंने कहा था कि,"महिलाओं का शरीर मंदिर के जैसा है।" उनके इस बयान पर काफी विवाद हुआ। इससे पहले उनके कंडोम पर दिए गए बयान पर भी विवाद हुआ था।

इन दोनों बयानों के बाद मोदी सरकार के इन मंत्रियों पर सवाल खड़े होने लगे और विरोधी पार्टियां इनको घेरने लगीं। हालांकि दोनों ही नेताओं ने कहा कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया और गलत मतलब निकाला गया।

स्मृति ईरानी की डिग्री पर विवाद

इन सौ दिनों में जिस विवाद की सबसे ज्यादा चर्चा रही वह था मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री पर खड़ा हुआ विवाद। आरोप था कि स्मृति ने अपने हलफनामे में गलत जानकारी दी है।

स्मृति की ओर से दावा किया गया कि उनके पास याले विश्वविद्यालय की डिग्री है लेकिन इस पर भी तमाम सवाल खड़े हो गए और सोशल मीडिया पर तमाम जोक्स भी वायरल होने लगे।

स्मृति की डिग्री पर विवाद उस समय भी खड़ा हो गया था जब वर्ष 2014 के चुनाव में दिए गए हलफनामे में उन्हें 12वीं पास तो वर्ष 2004 के हलफनामे में बीए पास बताया गया था।
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टीचर्स डे या गुरु उत्सव?

पांच सितंबर को भारत में टीचर्स डे मनाया जाता है और इस बार सरकार की योजना है कि मोदी का संदेश सीधे स्कूलों तक पहुंचाया जाए। वह तकनीक के माध्यम से लाखों बच्चों को एक साथ संबोधित करेंगे।

लेकिन इस योजना पर भी विवाद का साया मंडराने लगा है। बीजेपी के सहयोगी दलों पीएमके और एमडीएमके ने भी इस पर आपत्ति जताई है।

दक्षिण भारत के स्कूलों के अलावा कई प्राइवेट स्कूलों को भी इस पर आपत्ति है। देखना ये होगा कि क्या मोदी अपने विचार के मुताबिक इस साल देश में गुरु उत्सव मना पाएंगे?
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