छोटे होते जोत के आकार और किसानों के लिए घाटे का सौदा बन रही खेती में सुधार के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने खेती-किसानी को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है।
सरकार का इरादा प्रदेश में कांट्रैक्ट फॉर्मिंग (समझौता खेती) को बढ़ावा देने का है। इसके लिए लीज कानूनों में बदलाव किए जा रहे हैं।
इससे निजी कंपनियां किसानों से पट्टे पर जमीन ले सकेंगी। माना जा रहा है कि निजी हाथों में कृषि की बागडोर सौंपने से प्रदेश में बीटी कॉटन की खेती भी शुरू हो जाएगी।
बारहवीं पंचवर्षीय योजना में उत्तर प्रदेश सरकार ने कृषि क्षेत्र की विकास दर का लक्ष्य 5.2 फीसदी निर्धारित किया है। इसे हासिल करने के लिए अखिलेश सरकार ने प्रदेश के लिए नई कृषि नीति तैयार की है।
जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी। इसके तहत प्रदेश में खेती की बागडोर निजी क्षेत्र को सौंपी जाएगी। इसके लिए लीज कानूनों में बदलाव का काम चल रहा है।
इससे निजी क्षेत्र की कंपनियां प्रदेश के किसानों से पट्टे पर जमीन ले सकेंगी। सरकार ने कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) कानून में भी संशोधन किया है।
इससे मंडी पर से सरकार का अधिकार भी समाप्त हो जाएगा और निजी कंपनियां अपने उत्पादों की बिक्री के लिए अपनी स्वतंत्र मंडियां स्थापित कर सकेंगी।
किसान नेता सुधीर पवार ने बताया कि प्रदेश सरकार की नई कृषि नीति का उद्देश्य संविदा खेती को प्रोत्साहित करने का है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से प्रदेश में कॉरपोरेट खेती की शुरुआत हो सकती है।
जो उचित कानूनी प्रावधानों के बिना छोटे किसानों को खेती से वंचित करेगी। नई नीति में डार्क जोन वाले क्षेत्रों में किसानों को ट्यूबबेल या अन्य सिंचाई सुविधा स्थापित करने से पहले सरकार से लाइसेंस लेना जरूरी होगा।