लोकसभा चुनाव करीब हैं और तैयारियां जोरों पर हैं। जाहिर है, यह दौर टिकट हासिल करने का है। एक चुनावी टिकट काफी है नीयत बदलने के लिए। कई नेता इसलिए इन दिनों नीयत बदलने को तैयार हैं और पार्टी भी।
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पुराने साथियों को भला-बुरा कहा जा रहा है, पुराने दुश्मनों से गलबहियां हो रही हैं। यानी सियासत के मैदान में हर हथकंडा देखने को मिल रहा है। लालू के 'हनुमान' का दर्जा पाने वाले रामकृपाल यादव पार्टी छोड़ रहे हैं। अपने रूठे चाचा को मनाने के लिए लालू की बेटी मीसा कोशिश कर रही हैं।
लालू एक बार फिर अपने साले का स्वागत कर रहे हैं। दिल्ली में आम आदमी पार्टी को टिकट मांगने वालों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा हाई-प्रोफाइल सीटों पर बड़े नेताओं के बचपने से परेशान है। कुल मिलाकर राजनीतिक रायता फैला हुआ है। इस बीच कुछ नेता ऐसे भी हैं, जो लोकसभा टिकट मिलने के बाद उसे लौटा भी रहे हैं। हैरानी भले हो, लेकिन ये नेता ऐसा कदम उठा चुके हैं।
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सविता भट्टीः फ्लॉप हुआ शो
फ्लॉप शो जैसे कार्यक्रम से देश भर में धूम मचाने वाले स्तरीय कॉमेडियन जसपाल भट्टी की विधवा सविता भट्टी आम आदमी पार्टी में शामिल हुईं, तो लगा कि नए दल को दमदार दावेदार मिल गया है।
लेकिन कुछ ही दिनों में सारी खुशी काफूर हो गई। सविता भट्टी ने जोर का झटका दिया और साफ कर दिया कि वह चंडीगढ़ से चुनाव नहीं लड़ेंगी। उन्होंने 'आप' का चुनाव टिकट लौटा दिया।
जब यह घटनाक्रम हुआ, तो कहा गया कि सविता ने अंदरूनी कलह की वजह से यह कदम उठाया है। सविता ने इस बात से नाराज होकर पार्टी टिकट लौटाया कि पार्टी के कई स्थानीय कार्यकर्ता उनका समर्थन नहीं कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनावों के लिए अपने प्रत्याशियों की तीसरी सूची जारी की थी, जिसमें सविता भट्टी को चंडीगढ़ से चुनाव प्रत्याशी घोषित किया गया था। हालांकि, वो पार्टी में बनी हुई हैं।
राजू श्रीवास्तवः कॉमेडी से ट्रेजेडी तक
उत्तर प्रदेश में कानपुर सीट को लेकर कहा जा रहा था कि यहां सबसे दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है। लेकिन इससे पहले ही समाजवादी पार्टी को तगड़ा झटका लगा। कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने सपा का टिकट लौटा दिया है। राजू ने पार्टी में गुटबाजी का आरोप लगाते हुए यह कदम उठाया है।
राजू ने कथित तौर पर यह भी एलान किया है कि वह चुनाव भी नहीं लड़ेंगे। हालांकि, सूत्रों की मानें तो राजू किसी दूसरी पार्टी के साथ जाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि राजू को कानपुर से हार का डर भी सता रहा था। बहरहाल, पिछले कुछ दिनों के वाकयों पर नजर डालें तो सपा में टूट-फूट बढ़ती ही जा रही है।
राजू श्रीवास्तव ने एक खबरिया चैनल से बातचीत में कानपुर संगठन में चल रही अंदरूनी राजनीति को टिकट लौटाने की वजह बताया है। राजू ने कहा कि मुलायम सिंह यादव ने एक साल पहले मेरा टिकट पक्का किया था और कई मंचों से इसका एलान भी किया था, लेकिन कानपुर संगठन में कई लोग खुद ही प्रत्याशी मानकर काम कर रहे थे।
भागीरथ प्रसादः पल में बदला पाला
कांग्रेस को भी झटका लगा है। पहले जगदंबिका पाल जैसे वरिष्ठ नेता ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और ऐसी अटकलें लगाई जाने लगीं कि वो भाजपा का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, अब तक ऐसा हुआ नहीं है।
इस झटके से पार्टी से उभरी भी नहीं थी कि दूसरा झटका मध्य प्रदेश से लगा। वहां कांग्रेस के भिंड संसदीय क्षेत्र से तय दावेदार डॉ. भागीरथ प्रसाद ने पार्टी का दामन छोड़कर भारतीय जनता पार्टी के कुनबे में शरण ले ली।
हैरत की बात यह है कि उन्होंने यह कदम उठाने के लिए यह वक्त चुना। वो चाहते थे, तो ऐसा पहले भी कर सकते थे। लेकिन उन्होंने उम्मीदवारी मिलने के बाद यह फैसला किया। जाहिर है, भिंड सीट पर इसका नुकसान कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है।
इन नेताओं के बीच एक नाम ऐसा है, जो एक सीट विशेष से टिकट न मिलने के कारण अपने बरसों पुराने कुनबे को अलविदा कह गया। और इसे लेकन काफी सियासी ड्रामा हुआ।
लालू यादव का दाहिना हाथ कहे जाने वाले रामकृपाल यादव ने पाटलिपुत्र सीट से टिकट न मिलने की वजह से आरजेडी छोड़ने का फैसला किया। लालू की मजबूरी थी, क्योंकि उन्होंने यह सीट अपनी बेटी मीसा यादव को देने का फैसला किया।
मान-मनोव्वल का दौर चला। मीसा अपने चाचा को मनाने उनके घर गईं। पांच घंटे इंतजार किया। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। बाद में रामकृपाल ने कहा कि सीट दी जाए, तो वह गिले-शिकवे भुलाने को तैयार हैं। लेकिन लालू नहीं माने।