आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के खिलाफ दायर जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट की ओर से खारिज किए जाने के बाद शुक्रवार को इस मसले पर एक अवमानना याचिका दायर की गई है।
याचिका के मुताबिक गौतम बुद्ध नगर की एसडीएम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार अवैध रूप से बन रही इबादतगाह की दीवार को ढहाया और ऐसे में उनका निलंबन अदालत की अवमानना है।
नागपाल के निलंबन का आदेश देने वाले उत्तर प्रदेश सरकार के अफसरों के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू किए जाने का सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है।
अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा की ओर से दायर याचिका में निलंबित अधिकारी के खिलाफ सारी कार्यवाही निरस्त करने का अनुरोध किया गया है। शर्मा ने अपनी याचिका में उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार को प्रतिवादी बनाया है।
याचिका के अनुसार भारतीय प्रशासनिक सेवा की 2010 बैच की 28 वर्षीय अधिकारी के खिलाफ की गयी कार्रवाई मनमानीपूर्ण, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक है। गौतम बुद्ध नगर में एसडीएम पद पर तैनात दुर्गा शक्ति नागपाल ने जिले में रेत माफिया के खिलाफ अभियान चला रखा था।
उसे 27 जुलाई को नोएडा के एक गांव में निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार कानूनी प्रक्रिया का पालन किये बगैर ही गिराने का आदेश देने के कारण निलंबित कर दिया गया।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 20 सितंबर, 2009 और 16 फरवरी, 2010 के अलावा इस साल जनवरी में दिए आदेश का हवाला दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों, सड़क तथा सरकारी भूमि पर बनने वाले पूजा स्थलों को ढहाने का आदेश दिया था। साथ ही सभी राज्य सरकारों को आदेश दिया था कि वह सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनने वाली इबादतगाहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
याचिका के अनुसार दुर्गा शक्ति नागपाल ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया। मगर उत्तर प्रदेश सरकार की एक खास समुदाय को खुश करने की नीति के कारण उसे बलि का बकरा बना दिया गया।