अर्धसैनिक बलों में कार्यरत लाखों कांस्टेबलों के लिए खुशखबरी है। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसे बलों में कार्यरत कांस्टेबलों को अब पांच साल पहले ही पदोन्नत करने का फैसला किया है।
अभी तक हेड कांस्टेबल बनने में करीब 19-20 साल लग जाते हैं। साथ ही मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों में काफी पहले खत्म कर दिए गए हवलदार के पद को फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है।
सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी और सीआईएसएफ के प्रमुखों की एक समिति ने हाल ही में केंद्रीय गृहसचिव आरके सिंह से मुलाकात की।
इस बैठक के बाद हवलदार के पद के निर्माण का फैसला लिया गया। इस निर्णय से कांस्टेबल को हेड कांस्टेबल के तौर पर पदोन्नति के लिए लगने वाले 19-20 साल के लंबे वक्त को 5 साल कम कर देगा।
अब कांस्टेबल 14 साल में हवलदार के रूप में प्रोन्नत हो सकेंगे। हवलदार से हेड कांस्टेबल के रूप में पदोन्नति का समय करीब दो से तीन साल होगा।
इसका मतलब यह हुआ कि सुरक्षा बलों का आधार माने जाने वाले ये जवान 20 साल से कम वक्त में दो पदोन्नति हासिल कर सकेंगे। जबकि मौजूदा नियमों के अनुसार, वे दो दशकों में एक ही बार पदोन्नत हो पाते हैं।
गृहमंत्रालय ने सभी अर्धसैनिक बलों से इस संदर्भ में ब्लूप्रिंट तैयार करने और इस कदम को जल्द ही अपने बल में लागू करने को कहा है।
अर्धसैनिक बलों में करीब 5-6 लाख कांस्टेबल कार्यरत हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस नए कदम को गृहमंत्रालय से सैद्धांतिक सहमति मिल गई है।
इससे न केवल लाखों कांस्टेबल को फायदा होगा बल्कि देश के आंतरिक अहम जगहों पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के मनोबल को भी बढ़ाएगा।