महाराष्ट्र की सरकार में प्रमुख घटक दल एनसीपी के अंदरूनी झगड़े में कांग्रेस अपने मुख्यमंत्री को कुर्बान करने के लिए तैयार नहीं है। सूबे के सियासी संकट में भले ही मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की कुर्सी को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हों, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि चव्हाण को पद से हटाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।
एनसीपी के झगड़े से कांग्रेस आलाकमान खुद को बचाने में जुटा हुआ है। एनसीपी के अंदर चाचा (शरद पवार) बनाम भतीजे (अजित पवार) में वर्चस्व की छिड़ी जंग के लिए काफी हद तक पृथ्वीराज चव्हाण को वजह बताया जा रहा है। चव्हाण के कामकाज के अंदाज से अजित पवार काफी लंबे समय से नाराज चल रहे हैं। चव्हाण को हटाने को लेकर एनसीपी के अंदर कई बार आवाज बुलंद हुई है, मगर हर बार कांग्रेस आलाकमान ने इन आवाजों को अनसुना कर दिया है।
इस बार भी कांग्रेस आलाकमान ने यही रुख अपनाया है। हालांकि इस बार एनसीपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से निशाना साधा गया है। एनसीपी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा है कि पृथ्वीराज चव्हाण एनसीपी नेता अजित पवार का साथ नहीं दे रहे हैं। पटेल का कहना है कि जब किसी मंत्री के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाए जा रहे हों तो मुख्यमंत्री समेत पूरी सरकार को उनके साथ खड़ा होना चाहिए। मगर उन्हें अकेला छोड़ दिया गया और साथ ही आरोपों को और हवा दी जा रही है।
उधर, कांग्रेस आलाकमान ने पृथ्वीराज चव्हाण को महाराष्ट्र का संकट खत्म करने के लिए विधायकों को एकजुट करने का निर्देश दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ गुलाम नबी आजाद ने कहा कि एनसीपी यूपीए सरकार का सबसे महत्वपूर्ण घटक दल है। उन्होंने कहा कि उप मुख्यमंत्री अजित पवार के इस्तीफे में कांग्रेस का कोई हाथ नहीं है। उन्होंने कुछ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर इस्तीफा दिया है। यह कहना गलत है कि सरकार के अंदर और कांग्रेस से झगड़े के चलते उन्होंने ऐसा किया है।