लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस नए सिरे से मुसलमानों को सरकारी नौकरी में आरक्षण के मामले को उछालने की तैयारी में है।
अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री के रहमान खान ने राहुल गांधी को पत्र लिख कर मुसलमानों को 4.5 फीसदी आरक्षण दिलाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि इस पत्र में खान ने सच्चर कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया है।
उधर, इस मामले में राहुल को लिखी चिट्ठी पर भाजपा ने ताना मारते हुए कहा कि देश के इतिहास में किसी कैबिनेट मंत्री ने सांसद को पत्र लिख कर पहली बार किसी तरह की मांग की है। पार्टी ने इस पूरे मुद्दे को शोशेबाजी करार देते हुए इसे सरकार और कांग्रेस का चुनावी स्टंट बताया है।
पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने कहा, ‘मैं यह जानकर हैरान हूं कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किसी सांसद या अपनी ही पार्टी के उपाध्यक्ष को पत्र लिख कर मुसलमानों को आरक्षण दिलाने की मांग करते हैं। अब तक तो सांसद मंत्री के पास गुहार लगाते आए हैं। खान कैबिनेट मंत्री हैं, उन्हें बखूबी पता है कि ऐसी मांग सरकार के मुखिया से की जाती है। इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री को पत्र लिखना चाहिए था।’
शाहनवाज ने कहा कि दरअसल चुनाव नजदीक आने के कारण कांग्रेस हमेशा की तरह मुसलमानों को भ्रमजाल में फंसाना चाहती है क्योंकि उसे भी पता है कि हमारे देश का संविधान धर्म के आधार पर किसी को आरक्षण की इजाजत नहीं देता। फिर सवाल यह भी है कि कांग्रेस को चुनावी साल में ही मुसलमानों की याद क्यों आती है।
खान ने बीते दिनों मुसलमानों को सरकारी नौकरी में 4.5 फीसदी आरक्षण दिलाने के लिए राहुल को पत्र लिख कर पहल करने की मांग की है। मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि पत्र में सच्चर कमेटी की सिफारिशों का हवाला दिया गया है।