लोकसभा की सियासी जंग में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को घेरने में जुटी कांग्रेस ने अब उनकी जाति पर ही सवाल उठा दिया है। कांग्रेस ने कहा कि मोदी फर्जी ओबीसी हैं।
सच यह है कि वे गुजरात की जिस मोढ घांची जाति में पैदा हुए, वह परंपरागत रूप से समृद्ध वैश्य जाति रही है और घी का कारोबार करती है।
दूसरी ओर भाजपा ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि गुजरात में कांग्रेस के मुख्यमंत्री छबील दास मेहता के शासन में ही मोढ घांची जाति को ओबीसी घोषित किया गया था।
घी बेचने वाले घांची हैं मोदी
हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता शक्ति सिंह गोहिल ने दावा किया कि मोदी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद एक जनवरी, 2002 को खुद की जाति को ओबीसी की सूची में डाल दिया। उन्होंने कहा कि गुजरात में संपन्न वर्ग को मोढ कहते हैं और वहां मोढ ब्राह्मण और मोढ बनिया व मोढ घांची होते हैं।
घांची का मतलब तेली से नहीं बल्कि घी बेचने वालों से है। भाजपा ने आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि मंडल कमीशन की सिफारिशें होने के बाद 25 जुलाई 1994 की अधिसूचना में गुजरात की 105 पिछड़ी जातियों में इस जाति को शामिल किया गया था।
इस मसले को तूल देने पर भाजपा के नेता अंदरखाने खुशी जता रहे हैं। पार्टी नेताओं का मानना है कि पार्टी जितना मोदी की जाति को लेकर निशाना साधेगी। उतना भाजपा को फायदा होगा, क्योंकि आखिरी चरण में होने वाले चुनाव में ज्यादातर सीटों पर ओबीसी आबादी ज्यादा है।
'मोदी ने कभी नहीं बेची चाय'
शक्ति सिंह गोहिल ने मोदी पर यहां तक आरोप लगाया कि उन्होंने चाय कभी नहीं बेची बल्कि एक अपने एक रिश्तेदार की चाय की कैंटीन में बैठकर मोदी अपना खाली वक्त काटा करते थे।
उन्होंने कहा कि एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने उन्हें बताया था कि इस कैंटीन का ठेका वहां पर चरस बेचे जाने के कारण रद्द हुआ था।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे आरोप लगा रहे हैं कि मोदी चरस बेचते थे तो उन्होंने बेहद चालाकी से जवाब दिया कि वे मोदी की तरह हवा में आरोप नहीं लगाते। अभी वह सूचना के अधिकार के तहत इस संबंध में जानकारी मांग रहे हैं। सूचना मिलने के बाद ही वह इस संबंध में खुलासा करेंगे।