वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संकेत दिए हैं कि विदेश में काला धन जमा करने वालों की सूची में पूर्ववर्ती मनमोहन सरकार के एक मंत्री का नाम हो सकता है। लेकिन नाम के खुलासे के लिए इंतजार करना होगा। जेटली से एक न्यूज चैनल ने पूछा कि क्या सूची में यूपीए की मनमोहन सरकार के एक मंत्री का नाम होने की बात कह कर वह अन्य देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय समझौते में मौजूद गोपनीयता के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर रहे हैं। इस पर उन्होंने कहा, मैं जानता हूं कि आपका निशाना किस पर है। लेकिन नाम के खुलासे के लिए सही वक्त का इंतजार कीजिये।
जेटली से पूछा गया कि क्या वह इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं कि मनमोहन सरकार के एक मंत्री का नाम सूची में शामिल है। इस पर उन्होंने कहा, न तो मैं इसकी पुष्टि कर रहा हूं और न ही इससे इनकार। मैं तो सिर्फ मुस्करा रहा हूं। उनसे फिर पूछा गया कि क्या सूची में मनमोहन मंत्रिमंडल में शामिल कोई नाम है। इस पर उन्होंने कहा अगर मैं उनका नाम बताऊंगा तो यह अन्य देशों के साथ हुए समझौतों का उल्लंघन होगा।
जेटली ने कहा, अगर हम किसी राजनीतिक नेता और अन्य किसी के खिलाफ आरोप साबित कर पाएं तो नाम कोर्ट को बताया जाएगा और फि र इसे सार्वजनिक किया जाएगा। इस वक्त मैं इसकी तह में नहीं जाना चाहता। मैं नहीं चाहता कि मुझ पर संधि के उल्लंघन के आरोप लगे। विदेशी सरकार को ओर से नाम बताने के बाद मुकदमा चलाने की प्रक्रिया पूछे जाने पर जेटली ने कहा कि कानून के मुताबिक खातों का नाम सार्वजनिक किया जाएगा।
जेटली ने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट को यही बताना चाहते हैं कि हमारा मकसद उन लोगों के नामों का खुलासा करना है, जिनके खिलाफ काले धन के मामले में अदालत में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं। जेटली से कहा गया कि ऐसे मामले में राजनीतिक दल एक दूसरे को बचाने की फिराक में रहते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल गलत है। अगर मेरे विरोधी का नाम सूची में होगा तो मैं उसके नाम का खुलासा क रने में तत्परता दिखाऊंगा। उन्होंने कहा, हम सुप्रीम कोर्ट को यही बताना चाहते हैं कि हमारा मकसद उन लोगों के नामों का खुलासा करना है, जिनके खिलाफ काले धन के मामले में अदालत में आरोप पत्र दाखिल हो चुके हैं।
कांग्रेस के निशाने पर मोदी सरकार
विदेश में काला धन रखने वालों के नाम उजागर के वित्त मंत्री अरुण जेटली के बयान के बाद कांग्रेस ने उनपर निशाना साधा है। कांग्रेस ने कहा कि केंद्र सरकार काले धन के मुद्दे पर ब्लैकमेलिंग की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता अजय माकन ने अरुण जेटली के दिए बयान को सेलेक्टिव एप्रोच के तहत काम करने वाला बताया है। माकन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर सरकार 800 में से सिर्फ 136 नामों का ही खुलासा क्यों कर रही है, उसे सभी नामों का खुलासा करना चाहिए। आखिर चुनिंदा नामों के सामने लाने के पीछे क्या वजह है? उन्होंने कहा कि कांग्रेस अधूरा सच नहीं पूरा सच जानना चाहती है।
अजय माकन ने इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मोदी जी पूरा देश आपकी ओर देख रहा है कि आप उनसे किया हुआ वादा पूरा करेंगे। कालाधन वापस लाएंगे और सभी को 15 लाख रुपये देंगे।
इसके साथ ही अजय माकन ने साफ कर दिया केंद्र सरकार भले ही लाख कोशिश कर ले लेकिन कांग्रेस किसी से डरने वाली नहीं है। केंद्र सरकार का ब्लैकमेलिंग का रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जेटली के बयान पर शुरू हुआ विवाद
माकन के अलावा कांग्रेस के कई दूसरे नेताओं ने भी काले धन के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश की। अभिषेक मनु सिंघवी ने सरकार से सवाल किया कि पूरा देश जानना चाहता आखिर सरकार काला धन कब वापस ला रही है? सिंघवी ने सरकार पर जनता को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है।
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरूआत वित्त मंत्री अरुण जेटली के उस बयान के बाद हुई जिसमें उन्होंने कहा कि अगर इन खाताधारकों के नाम उजागर कर दिए जाएं तो कांग्रेस पार्टी को शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी।
एक निजी समाचार चैनल से बातचीत में जेटली ने कहा कि काला धन खाताधारकों के नाम जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगर सभी नामों को सार्वजनिक किया जाता है तो भाजपा को कोई शर्मिंदगी नहीं झेलनी पड़ेगी। उन नामों के कारण कांग्रेस को कुछ शर्मिंदगी झेलनी पड़ेगी।
इसके साथ ही उन्होंने ये भी जोडा़ कि विदेश में काला धन रखने वाले उन लोगों के नाम जल्द ही सार्वजनिक किए जाएंगे जिनके खिलाफ एजेंसियों ने आरोपपत्र दाखिल कर दिए हैं।