उत्तर प्रदेश चुनाव में समाजवादी पार्टी के चुनावी वादों का मखौल उड़ाने वाली कांग्रेस गुजरात विधानसभा चुनाव उसी के नक्शे-कदम पर है। यूपी चुनाव की रैली में राहुल गांधी ने भले सपा के घोषणापत्र को सार्वजनिक मंच से फाड़कर एंग्री-यंगमैन होने का ड्रामा किया, लेकिन गुजरात में उनकी पार्टी को सपा जैसी ही लोक-लुभावन घोषणाओं का आसरा है।
कांग्रेस ने गुजरात के चुनावी गदर में विद्यार्थियों को टैबलेट-लैपटॉप बांटने जैसे वादे किए हैं, तो शहरी इलाके की हर विवाहित महिला को राखी के उपहार के तौर पर मुफ्त मकान और ग्रामीण इलाकों में हर परिवार के लिए सौ गज का मुफ्त प्लॉट मुहैया कराने सरीखे सब्जबाग दिखाए हैं।
कांग्रेस ने सोनिया गांधी और नरेंद्र मोदी की धुआंधार सभाओं के बीच अपने वादों की विश्वसनीयता के लिहाज से कॉरपोरेट मामलों के केंद्रीय मंत्री सचिन पायलट से शुक्रवार को पार्टी मुख्यालय पर प्रस्तावित घर के मॉडल का लोकार्पण भी करवा लिया गया।
कांग्रेस ने यूपी चुनाव से सबक लेकर गुजरात में सारी पार्टियों को पीछे छोड़ सबसे पहले लोक-लुभावन घोषणाओं की शुरुआत की थी। इसके बाद तो भाजपा और केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी समेत सभी में बढ़-चढ़कर वादे करने की होड़ लग गई।
कांग्रेस ने हर महिला को ‘अपना घर’ का जो वादा किया, उसका नतीजा युपी में सपा के बेरोजगारी भत्ते जैसा दिखने लगा। कांग्रेस दफ्तरों में फॉर्म लेने वालों की लंबी कतारें लग गईं। पार्टी इसके लिए तैयार नहीं थी। नतीजा यह कि न भीड़ संभाल पाने के इंतजाम हुए, न पार्टी मांग के मुताबिक फार्म ही उपलब्ध करा पाई।
कांग्रेस की घोषणाएं
- विद्यार्थियों को मुफ्त टैबलेट-लैपटॉप
- अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चों को छात्रवृत्ति
- पेट्रोल-डीजल-सीएनजी पर वैट हटाएंगे
- दस लाख किसानों को बिजली कनेक्शन, कर्ज से राहत
- सभी गांवों में 16 घंटे बिजली देंगे
- हर गुजराती का मुफ्त इलाज
- जानकार मानते हैं कि कांग्रेस के घोषणापत्र के वादों को पूरा करने के लिए गुजरात के सालाना बजट जितनी रकम चाहिए
जवाब मोदी का
नरेंद्र मोदी, कांग्रेस से पीछे कैसे रहते? कांग्रेस के घरनुं घर के मुकाबले वे पांच साल में 50 लाख मकान मुफ्त देने की योजना ले आए। इनमें से 28 लाख घर गांवों में बनाने का वादा है, तो 22 लाख शहरों में। यदि वादे पर यकीन कर लिया जाए, तो सरकार बनने के दिन से पांच साल तक रोजाना दो हजार 739 घर बनाने का सपना। स्तंभकार प्रकाश शाह कहते हैं, मोदी के सपने कांग्रेस से बड़े और लुभावने तो होने ही थे।
कम केशुभाई भी नहीं
केशुभाई की जीपीपी के वादों पर नजर डालें, तो जिस बेरोजगारी भत्ते को कांग्रेस ने छोड़ दिया, उसे उसने पकड़ लिया। किसानों को मुफ्त बिजली, रसोई गैस सिलैंडर पर सौ रुपये राहत, शहरी गरीबों को मुफ्त मकान व गांवों में मुफ्त प्लॉट, सभी को मुफ्त इलाज और बजट की 25 फीसदी रकम मानव-विकास पर खर्च करने जैसे वादे उसके घोषणापत्र में हैं।