लोकसभा चुनाव हारने के बाद राज्यसभा में एंट्री करने की कवायद में जुटे रालोद सुप्रीमो चौधरी अजित सिंह पर एक बार फिर जाट आरक्षण का लालच भारी पड़ गया है। जाटों को केंद्र में आरक्षण देने के बाद भी लोकसभा और हरियाणा विधानसभा चुनाव में जाट वोटों का फायदा नहीं मिलने पर कांग्रेस ने चौधरी अजित सिंह की बजाय पीएल पूनिया को राज्यसभा का टिकट थमा दिया है। इससे रालोद में मायूसी छा गई हैं। पार्टी नेताओं ने दोबारा से संघर्ष करके पुरानी जमीन तैयार करने की बात कही है।
रालोद को मुजफ्फरनगर दंगे के बाद परंपरागत जाट-मुस्लमान गठजोड़ टूटने का सबसे बड़ा नुकसान हुआ था। विरोध के बावजूद चौधरी अजित सिंह जाटों को केंद्र में आरक्षण मिलने पर स्थितियां अनुकूल होने के भरोसे के चलते यूपीए सरकार में बने रहे। अजित सिंह को उम्मीद थी कि युवाओं के सुनहरी भविष्य के लिए लिया गया जाट आरक्षण पार्टी के लिए संजीवनी साबित होगा।
कांग्रेस ने भी मुसलिमों के विरोध और विपरीत परिस्थितियों में लोकसभा चुनाव से पहले जाटों को आरक्षण दिया था। दोनों दलों को उम्मीद थी कि इसका फायदा उन्हें लोकसभा और हरियाणा विधानसभा चुनावों में मिलेगा, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।