नीतीश कुमार का एनडीए से नाता टूटना तय देख कांग्रेस ने जद-यू पर डोरे डालने की शुरूआत कर दी है।
इस बात को लेकर लग रही अटकलों को राहुल गांधी के उस बयान ने और हवा दे दिया है, जिसमें कहा गया है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस के बड़े नेता बड़े फैसला करेंगे।
कांग्रेस ने भी जद-यू को समान विचारधारा वाली पार्टी बता कर चर्चाओं को तेज कर दिया है। पार्टी जद-यू से हाथ मिलाने से इंकार नहीं कर रही है। वह मौका देखकर जद-यू को दोस्ती के संकेत देने लगी है।
नीतीश ने फिलहाल अपना हाथ नहीं बढ़ाया है, मगर बीते सालों में कई मौकों पर जद-यू और कांग्रेस की नजदीकियों को देखते हुए गठबंधन के नए और चौंकाने वाले समीकरण से राजनीतिक पंडित इंकार नहीं कर रहे हैं।
नीतीश से रिश्ते के सवाल पर कांग्रेस अभी तक कह रही थी कि उनके एनडीए से अलग होने के बाद इस पर कुछ कहा जा सकता है, लेकिन अब राहुल गांधी ने संकेत दे दिए है कि जदयू से गठजोड़ पर पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी शीर्ष नेताओं के साथ गंभीरता से विचार कर रही हैं।
राहुल ने दो टूक कहा है कि इस मसले पर बड़े नेताओं को फैसला लेना है। इससे ऐसा लगता है कि अंदर कुछ न कुछ खिचड़ी पक रही है।
राहुल के बयान के चंद मिनटों बात ही कांग्रेस की ओर से कुछ ज्यादा खुलकर बयान आ गया।
पार्टी प्रवक्ता भक्त चरण दास ने कहा कि जदू-य और हमारी विचारधारा समान हैं और हम चाहते है कि सांप्रदायिक शक्तियों को रोकने वाले एक साथ आएं। दास की माने तो कांग्रेस जदयू से दोस्ती चाहती है।
यूपीए सरकार ने तो पहले ही जदयू को लुभाने का कोई मौका नहीं छोड़ा है।
पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के बार-बार मांगने के बावजूद केंद्र ने बिहार को ही अब तक बैकवर्ड रिजनल फंड से 12 हजार करोड़ का मोटा आर्थिक पैकेज दिया है। नीतीश भी एनडीए से बगावत कर यूपीए के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को खुला समर्थन दे चुके हैं।
उधर, बिहार में लालू यादव कांग्रेस से सियासी रिश्ते बनाने के लिए बेकरार हैं। मगर पिछले लोकसभा चुनाव में कम सीटें देने की राजद की पेशकश को कांग्रेस अभी भूली नहीं है।
राहुल खुद लालू के साथ जाने के पक्ष में नहीं है। ऐसी सूरत में नीतीश से नजदीकियां बढ़ने की बात को ज्यादा बल मिल रहा है।