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कांग्रेस-नेशनल कांफ्रेंस में झगड़ा, उमर देंगे इस्तीफा?

Wed, 29 Jan 2014 12:18 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जम्मू और कश्मीर में सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस गठबंधन के बीच प्रशासनिक इकाई के गठन के सवाल पर तनातनी चरम पर पहुंच गई है।
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एनसी जहां प्रशासनिक इकाई के गठन पर अड़ी हुई है, वहीं कांग्रेस की राज्य इकाई इस मामले में झुकने के लिए तैयार नहीं है।

राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर 31 जनवरी तक मामले का निपटारा न होने पर इस्तीफे तक की धमकी दे डाली है।

पढ़ें, उमर ने मेहर को बताया, कश्मीर का हल

माना जा रहा है कि 2 फरवरी को राज्य की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस मसले पर उमर से बातचीत करेंगे।

जबकि राजनीतिक विवाद को टालने के लिए खुद सोनिया और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के हस्तक्षेप करने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

प्रशासनिक इकाई के गठन के सवाल पर कांग्रेस और एनसी के बीच दूरियां लगातार बढ़ रही हैं। उमर ने सोमवार देर रात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की और 31 जनवरी तक विवाद टालने का अल्टीमेटम दिया।
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उन्होंने हर हाल में प्रशासनिक इकाई के गठन की बात करते हुए कांग्रेस नेतृत्व को गठबंधन के संबंध में अंतिम निर्णय लेने के लिए कहा है।

कांग्रेस के केंद्रीय नेताओं ने राज्य इकाई के नेताओं के साथ मंगलवार को बैठक कर मामले पर विचार विमर्श किया। राज्य के नेताओं ने इस मसले पर न झुकने को कहा है।

इन नेताओं का कहना है कि इस कदम से केवल एनसी को ही फायदा होगा, कांग्रेस को नहीं। कांग्रेस गठबंधन में आई तल्खी को स्वीकार कर रही है, मगर पार्टी उम्मीद कर रही है कि विवाद का हल निकल आएगा।

विवाद की वजह
एनसी और कांग्रेस के बीच विवाद की वजह उमर अब्दुल्ला सरकार का राज्य में 700 नई प्रशासनिक इकाइयों के गठन करने की योजना है।

इस योजना के अमल पर हर साल करीब 800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके तहत घाटी में पटवारियों और नायब तहसीलदारों की नियुक्तियां की जाएंगी।

बातचीत बेनतीजा
मसले के समाधान के लिए उमर अब्दुल्ला की जम्मू कश्मीर की कांग्रेस प्रभारी अंबिका सोनी, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज के साथ लंबी बातचीत हुई लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। बैठक में दोनों पक्ष अपने अपने स्टैंड पर अड़े रहे।

कांग्रेस के विरोध का कारण
कांग्रेस उमर के इस कदम को सियासी नफे-नुकसान की नजर से देख रही है। पार्टी की राज्य इकाई इस योजना पर होने वाले खर्च को फिजूलखर्ची करार दे रही है।

साथ ही उसका कहना है कि इसके तहत नियुक्तियां केवल घाटी में होंगी, जिसका राजनीतिक फायदा एनसी को होगा। साथ ही कांग्रेस के एक खेमे का मानना है कि उमर राज्य में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव कराना चाहते है।

उनका इरादा कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ने का ताकि उनकी पार्टी को कांग्रेस विरोधी माहौल का नुकसान न उठाना पड़े।

एनसी का तर्क
दूसरी ओर, नेशनल कांफ्रेंस का कहना है कि कांग्रेस के पिछले मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने आठ नए जिले बनाए थे। एक प्रशासनिक इकाई एक जिले से काफी छोटी होती है। इस वजह से इस मसले पर कांग्रेस का विरोध करना समझ से परे है।

पहले भी रहे हैं मतभेद
प्रशासनिक इकाइयों के गठन को लेकर गतिरोध का मामला दोनों दलों के बीच तीखे मतभेदों में ताजा है। इससे पहले दोनों के बीच स्वायत्तता और सेना को व्यापक शक्तियां देने वाले आफस्पा को हटाने के मुद्दे पर भी मतभेद थे। 
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