आम आदमी पार्टी के नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामा अब पुरानी बात हो चली है। कश्मीर पर विवादित बयान देने वाले प्रशांत भूषण और अपनी पुरानी टिप्पणियों को लेकर कई बार फंसे कुमार विश्वास के संवाददाता सम्मेलन में बवाल मच चुका है।
हालांकि, अब तक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस मामले में कुछ खुशकिस्मत रहे थे। लेकिन गुरुवार को जब केजरीवाल जब अपनी एक महीने पुरानी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे, तो बखेड़ा हो गया।
अरविंद केजरीवाल जब संवाददाताओं के सवालों का जवाब दे रहे थे और कॉन्फ्रेंस अपने अंत की ओर बढ़ती दिख रही थी, तभी एक शख्स जोर-जोर से चिल्लाने लगा। शुरुआत में समझ नहीं आया कि वह वो कौन है, लेकिन बाद में यह साफ हो गया।
फिर उछला बटला एनकाउंटर का मामला
हंगामा मचाने वाले ओखला से कांग्रेस के विधायक आसिफ मोहम्मद खान थे, जिन्होंने बाद में कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में बटला हाउस एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराने की बात कही थी, लेकिन अब यह साफ मुकर गए हैं।
खान ने कहा, "इन लोगों ने अपने घोषणापत्र में यह बात क्यों कही थी? ओखला की गलियों में पर्चे बंटवाए थे कि बटला हाउस मामले की जांच कराई जाएगी। आज मैं सुन रहा था, तो इन्होंने साफ मना कर दिया।"
उन्होंने कहा, "चार साल से कोर्ट में केस चल रहा है। केजरीवाल झूठ बोल रहे थे। जैसे दिल्ली को बेवकूफ बनाएगा, वैसे ही ओखला की जनता को पागल बना रहे हैं। 84 के दंगों के मामले में एसआईटी से जांच कराई जाए, हमें इस बात पर कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन मुसलमानों के साथ भेदभाव क्यों कर रहे हैं।
केजरीवाल ने किया साफ मना
दरअसल, संवाददाता सम्मेलन के दौरान अरविंद केजरीवाल से बटला हाउस एनकाउंटर की जांच के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने इससे साफ मना कर दिया। इस मामले की जांच के बारे में केजरीवाल ने कहा, "नहीं सर। कोर्ट का फैसला आ चुका है, हम कोर्ट के फैसले की इज्जत करते हैं। यह मामला अब खत्म है।"
आसिफ मोहम्मद खान ने कहा कि कांग्रेस भले उन्हें पार्टी से निकाल दे, लेकिन वह दिल्ली विधानसभा में केजरीवाल के खिलाफ वोट करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं पार्टी से निकाल दिया जाऊं, लेकिन इसके पक्ष में वोट नहीं दूंगा। इन्होंने छल-कपट किया है, उसे पब्लिक के सामने लेकर आइए।"
खान ने कहा कि कांग्रेस को आम आदमी पार्टी से समर्थन वापस लेना चाहिए, जो लोग घोषणापत्र में वादा करके बाद में मुकर जाते हैं। केजरीवाल का कहना था कि घोषणापत्र में ऐसी कोई बात नहीं है।
सीएम ने बताई बरखा को हटाने की वजह
जाहिर है, एक महीने की अपनी उपलब्धियां गिनाने बैठे मुख्यमंत्री यह बात पहले से जानते थे कि दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष बरखा सिंह को हटाने के फैसले पर सवाल जरूर खड़ा होगा, ऐसे में उनका जवाब तैयार था।
केजरीवाल ने कहा, "बरखा सिंह निष्पक्ष तौर पर काम नहीं करती, इसलिए उन्हें हटाया जा रहा है। वह कांग्रेस की प्रवक्ता थीं। धीरे-धीरे सभी अहम पदों से राजनीतिक लोगों को हटाया जाएगा। स्वतंत्र लोग लाए जाएंगे। इन पदों पर अगर पार्टी के लोग बैठेंगे, तो कैसे काम करेंगे?"
मुख्यमंत्री ने कहा, "महिला आयोग में भी यही होता था। बरखा कैसे स्वतंत्र काम कर सकती हैं। वो जो भी काम करेंगी, उसका राजनीतिक एंगल होगा। उनकी जगह मैत्रेयी पुष्पा जी को यह जिम्मा दिया जाएगा। वो एक ऐसा नाम हैं, जिसे देश जानता है।"
सोमनाथ से इसका कोई ताल्लुक नहीं
यह पूछने पर कि क्या दिल्ली सरकार अपने कामकाज से कहीं ज्यादा विवादों की वजह से सुर्खियां नहीं बटोर रहीं, इस पर अरविंद केजरीवाल ने कहा, "मुझे ऐसा नहीं लगता कि विवाद भारी पड़ रहे हैं। सरकार ने काम किए हैं और जनता को दिख भी रहे हैं। सर्वे बता रहे हैं कि लोग खुश हैं। सरकार काम करेगी, तो विवाद भी होंगे। सरकार काम नहीं करेगी, तो विवाद भी नहीं होगा।"
दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती को लेकर काफी बवाल मचा था और उसके बाद बरखा को हटाने का फैसला भी विवादों के घेरे में आया। इस पर केजरीवाल ने कहा, "बरखा को सोमनाथ की वजह से नहीं हटाया गया। दिल्ली महिला आयोग में उनका ट्रायल नहीं चल रहा। उन्हें वहां सिर्फ वहां पेश होना था।
केजरीवाल ने कहा, "इस मामले में उप-राज्यपाल ने जांच के आदेश दिए थे। मैंने कुछ नहीं किया। जस्टिस गर्ग की अगुवाई में यह जांच होगी। एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है। मामले की स्वतंत्र जांच चल रही है। इस मामले का सोमनाथ से कोई लेना-देना नहीं है। पुष्पाजी से पहली बार मुलाकात हुई। अगर अच्छे लोग आएंगे, तो अच्छा ही है।"
'हड़ताल खत्म न हुई, तो हटाया जाएगा'
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग विरोध प्रदर्शन के दौरान धरने पर बैठे हों और मुख्यमंत्री खुद उनके पास जाए, ऐसा कभी नहीं हुआ। लेकिन वो खुद गए। केजरीवाल के मुताबिक उन्होंने शिक्षकों से पूछा कि कितने दिन हो गए नौकरी पक्की करने की मांग उठाते हुए, तो जवाब आया चार साल।
केजरीवाल ने कहा, "हमें चार महीने तो दे दो। इसके बाद उन्होंने कहा कि हमें नौकरी से निकाला न जाए। मैंने चीफ सेक्रेटरी से बात की। उन्हेंने आवश्वासन दिया कि ज्यादा लोग नहीं निकाले जाएंगे। मैंने बाहर आकर कहा कि नहीं निकाला जाएगा। वो लोग तब भी नहीं हटे। मांग की कि अनुबंध 10 मई को खत्म हो रहा है, उसे बढ़वा दो। मैंने कहा कि जब तक कमेटी की सिफारिशें लागू न हो जाए, तब तक नहीं निकाला जाए। वो फिर भी नहीं हटे। बोले अभी पक्का करो। अब मैं उन्हें चौबीस घंटे में पक्का नहीं कर सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा, "डीटीसी में यही खेल चल रहा है। मुझे सहानुभूति है। उन लोगों का शोषण हो रहा है, यह भी पता है। लेकिन वक्त देना होगा। काम पर लौटना होगा। छह सौ बसे बाहर नहीं रहेंगी। अगर हड़ताल खत्म नहीं होती, तो नए लोगों को रखा जाएगा और पक्का करते वक्त भी केवल उन पर गौर करेंगे।"
केजरीवाल ने गिनाए सरकार के काम
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमसे पहले की सरकार ने भी सिख विरोधी दंगों की जांच एसआईटी से कराने का वादा किया था, लेकिन कुछ किया नहीं गया। एसआईटी पर उप-राज्यपाल ने सकारात्मक रुख दिखाया है। अगर कैबिनेट इस प्रस्ताव को पास कर देती है, तो फिर इसे एलजी के पास ले जाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्वराज का कानून बेहद अहम है। इसका मसौदा बनाया जा रहा है। इसे असेंबली सेशन में रखा जाएगा। यह एक ऐसा कदम है, जिसकी संभावना आज नहीं समझ पा रहे, लेकिन यह जनतंत्र के प्रारूप को बदलने का दम रखता है।
केजरीवाल ने कहा कि वह सादगी की राजनीति चाहते हैं, इसलिए दिल्ली में वीआईपी कल्चर खत्म किया गया। उन्होंने कहा, "हमने अपनी मौजूदा सुविधाएं भी बंद कर दीं। कई ऐसे मुल्क हैं, जहां पीएम बस में जाता है। हम भी वैसे ही रहना चाहते हैं।"
बिजली-पानी पर की अपनी तारीफ
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली के मामले में तीन अहम कदम उठाए गए। उन्होंने कहा, "एक स्लैब के लिए रेट आधे किए गए। सीएजी का ऑडिट किया गया। पिछली सरकार कह रही थी कि हम ऑडिट करना चाहते हैं, लेकिन हाई कोर्ट में मामला होने की वजह से नहीं कर पा रहे। लेकिन जब हम आए तो पता लगा कि ऐसा कुछ नहीं है। और इस मामले में भाजपा मिली हुई थी।"
केजरीवाल ने कहा, "दिल्ली में बहुत से लोगों की शिकायत है कि मीटर तेज चल रहे हैं। हमने दो एजेंसियों को मीटर टेस्टिंग के लिए बोला है। जो शिकायत करेगा, उसके मीटर चेक होंगे। वो डीसी, एसडीएम, सचिवालय में शिकायत कर सकते हैं।"
उन्होंने पानी पर भी अपनी सरकार की उपलब्धियां बताईं। उन्होंने कहा, "20 किलोलीटर पानी माफ किया गया। लेकिन यह कोई बड़ी बात नहीं है। बड़ी बात तब होगी, जब हर घर पानी पहुंचेगा। बहुत घरों में पानी आता ही नहीं। पाइपलाइन नहीं है। उसे बिछाना चुनौती है। यह दो दिन में नहीं हो सकता।
सीएम ने कहा कि अगर यह सोचते हैं कि दूसरे राज्यों से पानी मिलता रहेगा, तो यह गलत है। आने वाले वक्त में मांग और बढ़ेगी। हमें पानी बचाना होगा। ग्राउंडवाटर के लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा, "इसी सिलसिले में मिलेनियम बस डिपो को शिफ्ट किया जाएगा। कोर्ट में केस चल रहा था। पिछली सरकार कह रही थी कि नहीं हटाएंगी। एनजीओ कह रहे थे कि हटाओ। हमने सोचा कि यह सही डिमांड है, तो लड़ना क्यों?"
नर्सरी हेल्पलाइन, एफडीआई बड़े फैसले
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार ने हाल में जो नर्सरी हेल्पलाइन शुरू की, उसे लेकर बढ़िया फीडबैक आ रहे हैं। बहुत दिक्कत आती थी लोगों को। डोनेशन मांगी जाती थी। अब इसकी मदद ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली से गाजियाबाद-नोएडा जाना हो तो ऑटो वाला मना कर देता था। हमने साढ़े पांच हजार ऑटो को परमिट दिया है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के कारोबारियों की मांग को ध्यान में देखते हुए रिटेल सेक्टर से एफडीआई वापस लिया गया। सरकारी सकूलों को लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान बनाया जा रहा है और सभी स्कूलों को तदर्थ आधार पर प्रशासन चलाने के लिए एक-एक लाख रुपए दिए जा रहे हैं।
केजरीवाल ने कहा कि भ्रष्ट अधिकारियों को सजा और ईमानदार अफसरों को रिवार्ड, सुरक्षा मुहैया कराएंगे। हाल में एक्साइज विभाग के कॉन्स्टेबल शहीद हो गए थे, जिन्हें दिल्ली सरकार की ओर से एक करोड़ रुपए का मुआवजा दिया गया।
और चाहिए रैन बसेरे, काम बाकीः केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक महीने में 58 रैन बसेरे बनाए गए। कई और बन रहे हैं, लेकिन ये पर्याप्त नहीं है और अभी काफी काम किया जाना बाकी है।
केजरीवाल ने कहा कि सरकारें बदलती थी, तो कॉलेज में गवर्निंग बॉडी में नुमाइंदे बदल दिए जाते थे। दिल्ली में कुल 28 कॉलेज ऐडड हैं। हम चाहते, तो अपनी पार्टी के लोग भर सकते थे, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया।
हमने विज्ञापन निकाला है और कई अच्छे शिक्षाविद एप्लाई कर रहे हैं। इसी तरह स्लम बोर्ड में भी अब तक राजनीतिक दलों के लोग हुआ करते थे। उन्हें हटाकर अच्छे एनजीओ के लोग और समाजसेवी लाए जा रहे हैं।