कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के संकेत के बाद से अटकलों का बाजार गरम है।
मीडिया में भले ही नंदन नीलकेणी का नाम चर्चा में हो मगर कांग्रेस के अंदर राहुल गांधी नहीं तो कोई नहीं के पक्ष में हवा बनने लगी है।
पार्टी के एक बड़े तबका का मानना है कि यदि कांग्रेस को पीएम पद के उम्मीदवार को ऐलान करना ही है तो राहुल का किया जाए, वरना किसी का नहीं।
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पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि आखिरकार कांग्रेस अध्यक्ष भी इसी दिशा में अपना अंतिम फैसला करेगी। खासकर किसी गैर राजनीतिज्ञ व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने को लेकर पार्टी के कई नेता सख्त खिलाफ है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व को लेकर भी पार्टी के अंदर आक्रोश बढ़ रहा है।
बुधवार को जैसे ही नंदन नीलकेणी का नाम कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर सामने आया तो संसद भवन से लेकर कांग्रेस मुख्यालय 24 अकबर रोड में सुगबुगाहट शुरू हो गई। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस तरह की अटकलों पर हैरानी जाहिर की।
प्रियंका गांधी के नाम पर पार्टी सहमत नहीं
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राहुल के अलावा पार्टी के पास उम्मीदवारी के लिए कोई चारा नहीं है। एक वरिष्ठ महासचिव ने कहा कि या तो राहुल को बनाया जाना चाहिए नहीं तो फिर कोई नहीं होना चाहिए। प्रियंका गांधी के नाम को भी पार्टी व्यावहारिक नहीं मान रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि पार्टी का चेहरा अभी राहुल हैं। उनके रहते प्रियंका का परिदृश्य में आना संभव नहीं।
दबी जुबान में मनमोहन का विरोध
पार्टी प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने नीलकेणी को उम्मीदवार बनाने की खबरों पर कहा कि इस तरह की रिपोर्ट काल्पनिक है। ये बात जाने कहां से आ रही हैं। ये बिलकुल गलत है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की रहनुमाई में यूपीए सरकार की बदनामी को देखते हुए पार्टी के नेता किसी गैर राजनीतिज्ञ को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने के लिए हरगिज तैयार नहीं हैं।
पार्टी के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर तो खुलकर कह चुके है कि 2009 में मनमोहन सिंह को उम्मीदवार बनाने का फैसला गलत था। वहीं अब कई शीर्ष नेता दबी जुबान में मनमोहन का विरोध कर रहे हैं।
'भाजपा से ज्यादा खतरा नीली पगड़ी से'
दिल्ली के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा से ज्यादा असली खतरा तो नीली पगड़ी से है। उनका इशारा प्रधानमंत्री की ओर था। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कह चुके है कि यूपीए सरकार के खिलाफ महंगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दों से उनकी सरकारों को नुकसान हुआ।