संगठन के लिए उम्र सीमा तय करने को लेकर कांग्रेस में बुजुर्ग नेता भले ही सुर में सुर मिलाकर समर्थन कर रहे हों, लेकिन साठ साल से कम उम्र के जबरदस्त नेताओं ने इसका विरोध किया है। यही नहीं, ये नेता अनौपचारिक तौर पर बुजुर्गों के इन बयानों को उनकी राजनीतिक चाल तक बता रहे हैं।
इन नेताओं का यहां तक कहना है कि इन नेताओं का तो राजनीतिक कैरियर पूरा हो गया है और अपने पूरे कैरियर में इन्होंने कभी ये मुद्दा नहीं उठाया। अब जब उनकी रिटायरमेंट और दूसरे नेताओं का संगठन में बड़े पदों पर बैठने का वक्त आया है तो इस तरह की बात कर वे दूसरों का पत्ता काटने की कोशिश कर रहे हैं।
गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने पार्टी में भी भाजपा के फार्मूले का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि सक्रिय राजनीति की भी एक उम्र सीमा तय होनी चाहिए। इस तरह का नियम होना चाहिए कि संगठन में सक्रिय पद 65 से 70 साल के लोगों को नहीं दिए जाएं।
द्विवेदी के इस बयान का कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने खुलकर समर्थन किया है। द्विवेदी 69 और दिग्विजय 67 साल के हैं। दूसरी तरफ आनंद शर्मा कहते है कि सिर्फ उम्र को मापदंड नहीं बनाया जा सकता है। जब नेतृत्व की बात आती है तो यह देखना अहम होता है कि उसमें सेवा, स्वीकार्यता और प्रतिबद्धता है या नहीं।
वहीं मनीष तिवारी भी कहते हैं कि राजनीतिक सेवा को उम्र के बंधन में बांधना ठीक नहीं है। वैसे कांग्रेस पहले ही द्विवेदी के बयान को उनकी निजी राय बताते हुए दूरी बना चुकी है।