सरकार आर्थिक सुधारों से जुड़े वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और रियल स्टेट जैसे अहम बिलों को संसद के मानसून सत्र के तीसरे हफ्ते में कानूनी जामा पहनाने की कोशिश करेगी। दरअसल, नेशनल हेराल्ड मामले में संसद में अपनाए गए रुख पर चौतरफा आलोचना झेलने के बाद कांग्रेस दबाव में है।
सरकार को उम्मीद है कि इस दबाव में आई कांग्रेस इन विधेयकों का समर्थन कर सकती है। इसके लिए सरकार के रणनीतिकार सोमवार को कांग्रेस का मूड भांपने की कोशिश करेंगे। सपा, बसपा, बीजेडी, जदयू, टीआरएस, अन्नाद्रमुक और राकांपा की ओर से सकारात्मक रुख के बाद सरकार की निगाहें अब कांग्रेस पर टिकी है।
चूंकि जीएसटी संविधान संशोधन बिल है और इसे पारित कराने के लिए दो तिहाई सदस्यों का समर्थन अनिवार्य है। ऐसे में इन बिलों को कानूनी जामा पहनाने के लिए राज्यसभा में कांग्रेस का समर्थन हासिल करना सरकार के लिए अनिवार्य है। सरकार के रणनीतिकारों का कहना है कि जीएसटी पर टीएमसी ने भी अब तक अपना रुख साफ नहीं किया है, जबकि वाम दल सार्वजनिक तौर पर बिल के खिलाफ हैं।