भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को उनके राजनीतिक विरोधी रोज एक नया नाम दे रहे हैं।
कांग्रेस समेत अन्य विरोधी पार्टियां अब तक उन्हें लगभग दर्जन भर नाम दे चुकी हैं। इनमें से आधा दर्जन नाम तो पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के आधे सफर में ही मिल चुके हैं।
'मौत के सौदागर' से शुरू हुए मोदी के नामकरण का सिलसिला दानव तक आ पहुंचा है। इससे पहले उन्हें यमराज, भस्मासुर, फेंकू, हिटलर और कसाब जैसे नामों से पुकारा जा चुका है।
इनमें से ज्यादातर नाम मोदी के कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए 'शहजादा' शब्द के लगातार इस्तेमाल के बाद मिले हैं। फिलहाल अभी सत्ता का सेमीफाइनल चरण पूरा भी नहीं हुआ है और सत्ता का फाइनल बाकी है। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि मोदी के नामकरण का यह सफर कहां जाकर थमेगा।
मोदी और 'राजकुमार' की मुलाकात से गर्माई सियासत
शुक्रवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने मोदी की तुलना दानव से कर दी। दरअसल बहराइच की रैली में मोदी के कवरेज पर मीडिया पर लगाम लगाने के आरोप के बाद कांग्रेस-भाजपा में मीडिया युद्ध शुरू हो गया है।
मोदी ने आरोप लगाया कि हुंकार रैली के दिन राहुल की रैली को मीडिया द्वारा तवज्जो न दिए जाने से नाराज केंद्र सरकार ने कई टीवी चैनलों को नोटिस भेजा है।
इस पर पलटवार करते हुए तिवारी ने कहा कि प्रेस की आजादी पर दानव ज्ञान दे रहा है। इसके साथ ही तिवारी ने मोदी के खिलाफ लिखने पर एक पत्रकार को धमकी देने, टीवी कार्यक्रम को मोदी के बीच में ही छोड़ कर चले जाने जैसे कई उदाहरण देते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि दरअसल सरकार नहीं, मोदी ही मीडिया विरोधी हैं।
बहरहाल खास बात यह है कि मोदी को नया नाम देने का सिलसिला वर्ष 2002 में गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद से ही शुरू हो गया था।
हालांकि मोदी के पीएम पद का उम्मीदवार बनने के बाद तो इसमें बाढ़ सी आ गई है। खासतौर पर राहुल को शहजादा कहने पर जैसे को तैसा के अंदाज में जवाब देने की पार्टी महासचिव जनार्दन द्विवेदी की सीधी धमकी के बाद कांग्रेस नेताओं में मोदी को नया नाम देने की होड़ सी मच गई है।
नामकरण की इस सियासी खेल में फिलहाल भाजपा शहजादा से आगे बढ़ने के पक्ष में नहीं दिख रही। यही कारण है कि मोदी के हर रोज हो रहे नामकरण के बावजूद भाजपा और मोदी फिलहाल राहुल के लिए शहजादा शब्द का ही इस्तेमाल कर रहे हैं।