महारैली में तमाम राजनीतिक-आर्थिक मुद्दों को लेकर विपक्ष पर धावा बोलने वाली कांग्रेस और यूपीए सरकार महंगाई के मामले में बचाव करती दिखी।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ही नहीं राहुल गांधी भी महंगाई, विशेषकर रसोई गैस सिलेंडर की सब्सिडी में हुई भारी कटौती पर सफाई देते दिखे। सोनिया ने कहा कि वे बखूबी वाकिफ हैं कि महंगाई का बोझ आदमी खासकर गरीबों पर बहुत भारी पड़ रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने महंगाई रोकने में सरकार की नाकामी पर सफाई देते हुए कहा कि हमारी समस्या यह है कि हम 80 फीसदी कच्चा तेल आयात करते हैं। जबकि विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतें पिछले एक दशक में चार गुनी हो गई है इसलिए मजबूरी में कठिन फैसले करने पड़े हैं।
इस मजबूरी का हवाला देकर सरकार का बचाव करते हुए सोनिया ने कहा कि इसके बावजूद मिट्टी तेल, डीजल और रसोई गैस पर सब्सिडी अभी दी जा रही है। यूरिया की कीमतें भी बढ़ गई मगर उसमें भी सब्सिडी दी जा रही है।
इन तमाम आर्थिक दबावों के बावजूद राशन के दुकानों के गेहूं-चावल की कीमत नहीं बढ़ाई गई है जो सरकार की संवेदनशीलता का सबूत है। इन चुनौतियों के बीच सरकार खाद्य सुरक्षा कानून ला रही है जिसके लिए काफी संसाधन की जरूरत पड़ेगी। राहुल ने भी अपने गरीबों की स्थिति में बदलाव के लिए खाद्य सुरक्षा और भूमि अधिग्रहण कानून लाने की बात दोहराई।
प्रधानमंत्री ने डीजल सब्सिडी घटाने और रसोई गैस के रियायती सिलेंडरों की संख्या छह सीमित करने पर सफाई देते हुए कहा कि हमें यह समझना होगा कि चाहे कोई परिवार हो या सरकार उसका खर्च आमदनी से बहुत ज्यादा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि अगर सरकार का घाटा ज्यादा बढ़ा तो अर्थव्यवस्था में विश्वास घटेगा और निवेश कम होगा साथ ही महंगाई और बढ़ेगी। इसीलिए रियायती सिलेंडरों की संख्या साल में 6 रखी गई है क्योंकि करीब 50 फीसदी परिवार ही इतना या इससे कम सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं।