भोजन के अधिकार कानून के बजाय कांग्रेस अब भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के सहारे लोकसभा चुनाव में उतरने की योजना पर काम कर रही है। कांग्रेस की यह रणनीति भ्रष्टाचार पर शोर मचा रहे विपक्ष को उसी के हथियार से मात देने की है।
लोकपाल बिल पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सक्रिय रुख अपनाकर इसकी शुरुआत भी कर दी है। इस संबंध में पार्टी ने नेताओं को भ्रष्टाचार से कोई समझौता न करने की सख्त हिदायत पहले ही दे दी है। राहुल के इस निर्देश के बाद सरकार पूरी तरह से सक्रिय हो गई है।
शीतकालीन सत्र के पहले चरण में लोकपाल बिल को पास कराने के बाद सरकार ने इस सत्र के अगले चरण में भ्रष्टाचार से लड़ने वाले सभी लंबित विधेयकों को पास कराने की योजना बनाई है। भ्रष्टाचार से लड़ने में मददगार छह बिल अभी दोनों सदनों में लंबित पड़े हैं।
सरकार का इरादा इन सभी विधेयकों को इसी सत्र में पास कराना है। अल्पसंख्यक मामलों पर पिछले दिनों हुई बैठक में राहुल ने इसके संकेत दिए थे। इसके लिए सरकार निलंबित शीतकालीन सत्र को जल्द बुला सकती है। माना जा रहा है कि जनवरी के पहले सप्ताह में सत्र की तारीख घोषित हो सकती है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी ने लोकपाल बिल पास होने के दिन इन छह बिलों की जरूरतों पर बल देते हुए अपने संकल्प से सरकार को आगाह कर दिया था। राहुल के संकल्प को देखते हुए यूपीए सरकार इन पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है। सूत्रों का कहना है कि संसद के इसी सत्र में इन विधेयकों को पास कराने की तैयारी है। चूंकि शीतकालीन सत्र निलंबित रखा गया है। इसलिए इस सत्र के शेष भाग में इन छह बिलों को पास कराया जा सकता है।
लंबित बिल
लोकसभा में: प्रिवेंशन ऑफ करप्शन संशोधन बिल 2013, द राइट ऑफ सिटीजन टू टाइम बांड डिलीवरी ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज एंड रिर्डेशल ऑफ दियर ग्रिवांसेज बिल 2011, द पब्लिक प्रोक्योरमेंट बिल 2012 और बिल ऑफ एड्रेस फॉरेन ब्राइबरी एज रिक्वायर्ड अंडर आर्टिकल 16 ऑफ यूएनसीएसी
राज्यसभा में: ज्यूडिशियल स्टैंडर्स एंड एकाउंटेबिलिटी बिल 2010 और द व्हीसल ब्लोअर प्रोटेक्शन बिल 2011