रसोई गैस की आग की तपिश अब कांग्रेस को भी महसूस होने लगी है। खासकर हिमाचल प्रदेश में चुनावी खेल बिगड़ने की चिंता पार्टी में घर कर रही है। सूबे की भाजपा सरकार के मुफ्त इंडक्शन चूल्हा देने के वायदे से कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं महंगी रसोई गैस दूसरे राज्यों में भी कांग्रेस की हालत पतली कर रही है।
उत्तराखंड के टिहरी लोकसभा उपचुनाव में हार की प्रमुख वजहों में से एक रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या को सीमित करना बताया गया है। खुद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी पार्टी की आंतरिक रिपोर्ट में यही बात कही है। कांग्रेस के रणनीतिकार सरकार पर राहत देने के लिए दबाव बना रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश चुनाव में मतगणना के बाद अब कांग्रेस मुख्यालय में सूबे का चुनावी गणित जोड़ा घटाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की रिपोर्टों में यह तो कहा जा रहा है कि यहां कांग्रेस ने भाजपा सरकार को कड़ी टक्कर तो दी है। मगर महंगाई के मसले पर पार्टी को जनता का गुस्सा भी झेलना पड़ सकता है।
प्रदेश की धूमल सरकार ने रसोई गैस की काट के लिए इंडक्शन चूल्हे का फार्मूला निकाला है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक भाजपा के इस दांव से पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी में शीर्ष स्तर में रसोई गैस सिलेंडरों की संख्या को छह से ज्यादा करने की मांग की थी।
मगर सरकार ने इस मांग को अभी तक नहीं माना है। उधर, दूसरे पहाड़ी राज्य उत्तराखंड के लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। वहां मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे को ही हार का स्वाद चखना पड़ा।
प्रदेश कांग्रेस की ओर से कांग्रेस हाईकमान को सौंपी रिपोर्ट में बाकायदा एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को सीमित करने को हार की प्रमुख वजह बताया गया है।
साथ ही रिपोर्ट में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने भी महंगाई को प्रमुख वजहों में से एक माना है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।