अलग तेलंगाना राज्य की आग में कांग्रेस घिर गई है। अलग राज्य की मांग को लेकर पार्टी के अंदर ही राजनीतिक तूफान उठ खड़ा हुआ है। एक महीने में कोई न कोई हल निकालने की बात से यूपीए सरकार के पीछे हटने के बाद पार्टी को अपने ही सांसदों को समझाना मुश्किल हो रहा है। तेलंगाना क्षेत्र से पार्टी सांसदों ने यूपीए सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए संसद से इस्तीफे की धमकी दे दी है।
तेलंगाना समर्थक कांग्रेस सांसदों ने मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस्तीफा फैक्स से भेजने की दबाव की रणनीति अख्तियार की है। एक तरफ कांग्रेस के अंदर विरोध की आवाज बुलंद हो रही है तो दूसरी तरफ पार्टी पर चौतरफा राजनीतिक हमले शुरू हो गए है। भाजपा और वामदलों ने सुर में सुर मिलाकर कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोल दिया है।
भाजपा ने अलग राज्य की मांग को लेकर आगामी बजट सत्र में कांग्रेस के खिलाफ हल्ला बोलने का ऐलान किया है। लिहाजा, कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है। पार्टी को इस पर जवाब देना भारी पड़ गया है। कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मसला है। सभी पक्षों की बातों को ध्यान में रखकर ही कोई निर्णय सही समय में लिया जाएगा।
पार्टी के सामने संसद के बजट सत्र से पहले कोई न कोई हल निकालने का भारी दबाव है। पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मसले का हल बजट सत्र से पहले निकलने की उम्मीद तो जता रहे हैं, मगर वह निश्चित तौर पर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। दूसरी तरफ कांग्रेस के तेलंगाना क्षेत्र के एक दर्जन से ज्यादा लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा देने की धमकी देकर राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
एक-दो दिन में सांसद दिल्ली आकर भी हाईकमान के सामने अपना विरोध दर्ज करा सकते हैं। तेलंगाना समर्थक सांसद मधु याक्षी गौड़ा, एस राजैय्या, जी विवेक और पी प्रभाकर समेत तमाम तेलंगाना समर्थक सांसदों ने दावा किया है कि वह अलग राज्य के लिए कोई भी त्याग करने के लिए तैयार हैं। उधर, सरकार को राजनीतिक दबाव के साथ साथ आंध्र प्रदेश में कानून व्यवस्था बिगड़ने का डर है। तेलंगाना समर्थक सड़क पर उतर आए हैं, साथ ही तेलंगाना राज्य के विरोधी भी टकराव लेने के लिए उतारू है।
केंद्र को तेलंगाना के लोगों की फिक्र नहीं : राव
टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव ने केंद्र और आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर अलग तेलंगाना राज्य की मांग को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। राव ने कहा कि केंद्र तेलंगाना के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है। 1966 से लगातार अलग तेलंगाना राज्य की मांग की जा रही है। इस मसले पर निर्णय लेने के लिए कितनी कमेटियां गठित की जाएंगी। राव का यह बयान केंद्र और कांग्रेस द्वारा तेलंगाना राज्य पर निर्णय को एक बार फिर टाले जाने के चलते आया है। अलग तेलंगाना राज्य के आंदोलन की अगुवाई कर रहे राव ने कहा कि दिल्ली में चपरासी तक मुझे जय तेलंगाना कहकर बधाई दे रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार को लोगों की भावनाओं की चिंता नहीं है। क्या एक बार फिर 40 दिन लंबी तक चली हड़ताल करनी पड़ेगी। नेहरू से लेकर सोनिया तक कांग्रेस की तीन पीढ़ियों ने तेलंगाना के साथ धोखा किया।