इन दिनों राजधानी के सियासी गलियारों में इस बात को लेकर कयास तैर रहे हैं कि प्रधानमंत्री पद के लिए कांग्रेस की ओर से दावेदार कौन होगा?
ऐसा कहा जा रहा है कि भाजपा और नरेंद्र मोदी से मुकाबला करने के लिए पार्टी को इस नाम का ऐलान लोकसभा चुनावों से कुछ पहले करना होगा।
अगर राहुल गांधी यह तय करते हैं कि वह इस पद के लिए खुद को प्रोजेक्ट नहीं करेंगे, तो जाहिर है कांग्रेस को दूसरी ओर तलाश करनी होगी।
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टीओआई के अनुसार विधानसभा चुनावों के नतीजों वाली शाम सोनिया गांधी ने अपने बयान से भी कुछ संकेत दिए।
वित्त मंत्री पी चिदंबरम, रक्षा मंत्री ए के एंटनी और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे पीएम पद के दावेदारों में शामिल हैं। इसी होड़ में वाइल्डकार्ड एंट्री के रूप में दाखिल पाने वाले शख्स हैं यूडीएआई चेयरमैन और आधार कार्ड को जन्म देने वाले नंदन निलेकणी।
राजनीति से परहेज नहीं रखते
कांग्रेस अगर निलेकणी पर दांव लगाने के बारे में सोच रही है, तो इसके कारण भी हैं। वह राजनीति को लेकर कोई खास परहेज नहीं रखते, यह वह खुद साफ कर चुके हैं।
वह साउथ बंगलुरु से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और इसके लिए बड़ा प्रचार दल मैदान पर काम शुरू कर चुका है।
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जाहिर है, कांग्रेस के भीतर इसका विरोध भी हो रहा है। कुछ नेता ऐसे हैं, जो उनकी तुलना में कहीं ज्यादा अनुभव रखते हैं और पीएम पद के ज्यादा बड़े दावेदार हैं। इसके अलावा मनमोहन सिंह के प्रदर्शन ने टेक्नोक्रेट को लेकर बनाया जाने वाला माहौल कुछ कमतर किया है।
अगर निलेकणी को लेकर हवा बनती है, तो आधार योजना पर और हमले होंगे। हालांकि, उनके तहत 51 करोड़ कार्ड जारी किए जा चुके हैं और 60 करोड़ का लक्ष्य कुछ महीने में पूरा हो जाएगा।
आधार को बनाया कामयाब
आधार योजना को निलेकणी की क्षमता के रूप में पेश किया जाता है। हालांकि इस पर एक कांग्रेसी नेता ने कहा, "सबसे पहले इससे यह अनुमान लगाया जाएगा कि नाम का ऐलान किया जाएगा और राहुल इसमें दिलचस्पी नहीं रखते। दो दिन पहले उन्होंने कांग्रेस संगठन में बदलाव का वादा किया है। क्या ऐसा लगता है कि वह साइड हटना चाहते हैं?"
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लेकिन एक धड़े का मानना है कि कांग्रेस को अपनी पसंद सामने रखनी चाहिए। एक अन्य नेता ने कहा, "भाजपा और आप को इस बात से फायदा हुआ कि उनके पास मोदी और केजरीवाल के रूप में चेहरे थे।"