2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मसले पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर के खुलासे को लेकर सवालों के घेरे में आए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बचाव में कांग्रेस उतर गई है। पार्टी ने कहा है कि प्रधानमंत्री को चंद्रशेखर की चिट्ठी के संबंध में मीडिया में प्रकाशित बातें पूरी तरह सही नहीं हैं।
जेपीसी के सदस्य और कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने दावा किया है कि पूर्व कैबिनेट सचिव की चिट्ठी में यह कहीं नहीं लिखा गया है कि स्पेक्ट्रम आवंटन का एंट्री मूल्य 35-36 हजार करोड़ रुपये होना चाहिए। तिवारी की दलील है कि कैबिनेट सचिव ने महज एक अनुमान दिया था कि 2जी स्पेक्ट्रम का एंट्री मूल्य बढ़ाया जाता तो देश को इतने हजार करोड़ रुपये का कुल राजस्व मिलता।
दरअसल, पूर्व कैबिनेट सचिव के नोट से हुए सियासी धमाकों पर कांग्रेस ने पानी डालने की कोशिश की है। जेपीसी के सामने चंद्रशेखर ने पेश होकर 2जी मामले के संबंध में अपनी भूमिका के बारे में जानकारी दी थी। उनके इस खुलासे की वजह से एक बार फिर पूर्व संचार मंत्री ए राजा को स्पेक्ट्रम आवंटन की खुली छूट देने को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
मगर शुक्रवार को कांग्रेस ने इन रिपोर्टों को गलत बताया। मनीष तिवारी ने इन खबरों को मीडिया में लीक करने को लेकर भी अफसोस जाहिर किया। तिवारी ने पूर्व कैबिनेट सचिव के पत्र को ही मीडिया के सामने पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि वह जेपीसी में रखे गए इस पत्र को मीडिया के सामने पढ़कर परंपरा को तोड़ रहे हैं, लेकिन भ्रम को दूर करने के लिए उनका ऐसा करना जरूरी है।
चंद्रशेखर की ओर से प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पेक्ट्रम आवंटन के एंट्री मूल्य के बारे में बात नहीं की है, बल्कि कुल राजस्व के बारे में आकलन बताया गया है। साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि स्पेक्ट्रम के आवंटन को लेकर इसके नुकसान और राजस्व को लेकर कई तरह के आकलन किए गए थे।
उनमें से एक आकलन पूर्व कैबिनेट सचिव का भी था। तिवारी ने कहा कि कई आकलनों में तो स्पेक्ट्रम आवंटन से बेहद कम राजस्व और नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था। यही नहीं कांग्रेस प्रवक्ता ने पूर्व कैबिनेट सचिव के नोट को खामियों से भी भरा बताया है।
चंद्रशेखर के बयान को मुद्दा बनाने में जुटी भाजपा
पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर के संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने प्रधानमंत्री को सवालों के घेरे में खड़ा करने वाले बयान को भाजपा सियासी मुद्दा बनाने में जुट गई है। पार्टी ने इस बयान के बाद प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को गवाही के लिए बुलाने की मांग दोहराते हुए कहा कि उनके आने से ही सच्चाई सामने आ पाएगी। गुजरात और हिमाचल प्रदेश चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने टूजी और कोल आवंटन समेत भ्रष्टाचार के सभी मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मुहिम तेज कर दी है।
जेपीसी सदस्य व पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चंद्रशेखर के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि अब इस मामले में प्रधानमंत्री व वित्तमंत्री ही सच्चाई बता सकते हैं। इसलिए जेपीसी चेयरमैन पीसी चाको को अब इन दोनों नेताओं को गवाही के लिए बुलाना चाहिए। टूजी के साथ ही भाजपा ने कोल आवंटन मामले में भी सरकार को फिर से कटघरे में खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी है।
कोल आवंटन पर सबसे पहले सीवीसी से शिकायत करने वाले पार्टी सांसद हंसराज अहीर ने आरोप लगाया कि सरकार आवंटन रद्द करने के मामले में भी गड़बड़ी कर रही है। इसके लिए उन्होंने मामला देख रहे मंत्रियों के समूह के चेयरमैन तथा सीवीसी को पत्र लिखे हैं।
अहीर ने कहा कि वर्ष 2006 से 2008 के बीच आवंटित किए कोल ब्लॉक में से किसी से भी कोयला निकालने का काम शुरू नहीं हुआ है, इसलिए इन सभी को रद्द करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के समूह ने कम क्षमता वाले कोल ब्लॉक का आवंटन ही रद्द किया है।