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टिकट दो, वरना AAP में चला जाऊंगा

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आम आदमी पार्टी के रूप में नया विकल्प मिलते ही कांग्रेस, भाजपा, इनेलो और बसपा जैसी पार्टियों में बगावत के सुर तेज हो गए हैं। इनके टिकटार्थी नेता अपनी पार्टियों को बता रहे हैं कि उनके लिए दूसरा विकल्प खुल गया है।
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सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस, भाजपा एवं बसपा के कई नेता आप के संपर्क में हैं। हरी झंडी मिलते ही वे झाडू छपी टोपी सिर पर लगा लेंगे। इनमें कांग्रेस का एक जिला महासचिव भी है, जो पंजाबी समुदाय से ताल्लुक रखता है।

आयाराम-गयाराम की राजनीति चरम पर..

भाजपा एवं बसपा के कई नेता तो पहले ही ‘आप’ में शामिल हो चुके हैं। पार्क हो, कम्युनिटी सेंटर, बाजार या फिर सरकारी कार्यालय और फैक्ट्रियां। हर जगह चर्चा है कि इस बार चुनाव में आयाराम-गयाराम की राजनीति चरम पर होगी।

इससे एक ओर आप मजबूत हो रही है तो दूसरी ओर आम जनता में उसकी विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। इसका नमूना बल्लभगढ़ में आप के नेशनल मीडिया प्रमुख योगेंद्र यादव की सभा में दिखा।

आप में भी उठ रहे हैं व‌िरोधी स्वर

इससे एक ओर आप मजबूत हो रही है तो दूसरी ओर आम जनता में उसकी विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। इसका नमूना बल्लभगढ़ में आप के नेशनल मीडिया प्रमुख योगेंद्र यादव की सभा में दिखा।

यहां हरीशचंद्र त्यागी नामक स्वतंत्रता सेनानी ने दूसरी पार्टियों के नेताओं को लेने का विरोध किया था।

लोग सभा से उठकर जाने लगे थे। जनता का कहना है कि नए लोगों को पार्टी में शामिल करने की जगह पुरानी पार्टियों के लोगों को आप में लिया जाएगा तो गलत होगा। जिन नेताओं से पीछा छुड़ाने के लिए लोगों ने आप में दिलचस्पी दिखाई, वही फिर गले पड़ जाएंगे।

इसका भी है साइड इफेक्ट

राजनीति विज्ञान विशेषज्ञ राजेंद्र चोपड़ा कहते हैं क‌ि ‘आप का उदय पारंपरिक पार्टियों के खिलाफ हुआ है। इसलिए आप को दूसरी पार्टियों के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल करने में सावधानी बरतनी चाहिए, वरना इसका साइड इफेक्ट देखने को मिलेगा।

जिसे भी लिया जाए, उसका इतिहास जरूर खंगाला जाए। जब दिल्ली में बिल्कुल नए चेहरे जीत सकते हैं तो हरियाणा में क्यों नहीं। इसलिए नए चेहरों को वरीयता दी जाए’।

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कौन चुनाव लड़ेगा जनता तय करेगी

वहीं आप के ज‌िला संयोजक आभास चंदीला ने कहा क‌ि ‘ऐसा नहीं है कि किसी को चुनाव लड़ने के लिए पार्टी में लिया जा रहा है। सभी अच्छे लोगों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले हैं।

पार्टी की ओर से चुनाव कौन लड़ेगा, यह जनता ही तय करेगी। हमसे कई पार्टियों के नेता संपर्क में हैं, क्योंकि वह समाज में कुछ अच्छा करना चाहते हैं’।

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