चुनाव की संवेदनशीलता और दांव उल्टा पड़ने के अंदेशे से सहमी यूपीए सरकार ने नरेंद्र मोदी की कथित महिला साथी की जासूसी मामले की जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
तीन महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ऐसे किसी अवकाश प्राप्त जज को नहीं तलाश पाई जो इस जांच के लिए गठित आयोग की अध्यक्षता कर सके।
मोदी के खिलाफ इस चुनावी पांसे के पलटने के डर से घिरी सरकार अब किसी जज को ढूंढने की कोशिश भी नहीं कर रही है। गौरतलब है कि तीन महीने में इस आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंप देनी थी।