बनारस की सीट पर भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी का मुकाबला कौन करेगा, कांग्रेस इस फैसले तक पहुंचने से पहले काफी माथापच्ची कर रही है। ताजा खबरें बता रही हैं कि पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह यह जिम्मा संभाल सकते हैं।
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इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने भी कहा है कि वह लोकसभा चुनावों वाराणसी के मैदान में मोदी का मुकाबला करने को तैयार हैं।
लेकिन इस बीच ऐसी जानकारी सामने आ रही है, जो सियासी जानकारों को भी हैरान कर सकती है। इस रणनीति पर भी अमल हुआ था कि किसी बड़े खिलाड़ी या सेलेब्रिटी को मोदी के खिलाफ उतारा जाएगा, ताकि चौतरफा चुनौतियों के बीच कांग्रेस की चुनौती अलग नजर आए।
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सचिन तेंदुलकर लड़ेंगे मोदी के खिलाफ?
ऐसा लग रहा है कि मोदी के खिलाफ बनारस से किसी सेलेब्रिटी उम्मीदवार को उतारने की कांग्रेस की कोशिश अब अंत की ओर बढ़ रही है। टीओआई की खबर के मुताबिक चीफ इलेक्शन कमेटी की कई बैठकों के बावजूद पार्टी ऐसा उम्मीदवार नहीं तलाश सकी है, जो कद की इस जंग में मोदी को पटखनी दे सके।
खबरों के मुताबिक कांग्रेस ने सचिन तेंदुलकर से संपर्क साधकर उन्हें नरेंद्र मोदी के खिलाफ खड़ा होने का न्योता दिया था। सचिन कांग्रेस के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे हैं और इसके पीछे सोनिया गांधी-राहुल गांधी की अहम भूमिका बताई जाती है।
यहां तक कि सचिन तेंदुलकर ने जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया, तो उसी रोज उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न देने का ऐलान कर दिया गया। कांग्रेसी नेता राजीव शुक्ला के मुताबिक इस कहानी के पीछे भी सोनिया थीं।
मास्टर ब्लास्टर का इनकार
हालांकि, इन तमाम चीजों के बावजूद सचिन तेंदुलकर ने कांग्रेस का यह न्योता ठुकरा दिया कि वह मोदी के खिलाफ बनारस से चुनाव लड़ें। जाहिर है, अब तक सचिन ने खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखने का फैसला किया है।
इसके नतीजतन अब उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस स्थानीय उम्मीदवार अजय राय के खिलाफ अपना वजन लगा सकती है, जिनके पास एक लाख से ज्यादा भूमिहार वोट बताए जाते हैं।
दिग्विजय सिंह का नाम उछलने के बाद अजय राय ने विरोध का झंडा उठा दिया है। उनका कहना है कि बनारस में मोदी के खिलाफ कांग्रेस की तरफ से किसी स्थानीय नेता को मौका दिया जाना चाहिए।
अजय राय ने उठाया बगावत का झंडा
कांग्रेस ने पिछली बार साल 2004 में यह सीट जीती थी, जब राजेश कुमार मिश्रा को 2 लाख से ज्यादा वोट मिले थे। 2009 में मिश्रा चौथे पायदान पर लुढ़क गए थे और भाजपा के मुरली मनोहर जोशी को जीत मिली थी।
उस वक्त अजय राय समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़े थे और तीसरे नंबर पर रहे थे। राजीव शुक्ला ने पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का नाम उठाया था, लेकिन भारत रत्न तेंदुलकर ऑफर स्वीकार करने के लिए तैयार न थे।
बनारस में जो जातीय समीकरण हैं, उसके मुताबिक बनारस में मोदी के खिलाफ ब्राह्मण उम्मीदवार को उतारना मुफीद रहेगा। दिग्गी का कहना है कि अगर पार्टी कहे, तो वो मोदी के खिलाफ उतरने को तैयार हैं। दिग्विजय सिंह ने 2003 में चुनाव लड़ने से दस साल का संन्यास लिया था, जब उमा भारती ने उन्हें विधानसभा चुनावों में पटखनी दी थी।
क्रिकेट खिलाड़ियों पर चुनावी दांव लगा रही कांग्रेस केवल सचिन तेंदुलकर नहीं, बल्कि उनके साथ लंबे वक्त तक सलामी बल्लेबाजी कर चुके वीरेंद्र सहवाग पर भी गौर कर रही है।
दिल्ली में कांग्रेस ने अब तक सात में से पांच सीटों पर अपने दावेदारों का ऐलान किया है। ऐसी खबर आ रही है कि दक्षिणी दिल्ली से वह वीरेंद्र सहवाग को मैदान में उतार सकती है। सहवाग जाट हैं और इस सीट पर 5.29 फीसदी जाट वोटर हैं। इसके अलावा सहवाग की शोहरत का फायदा भी मिल सकता है।
इससे पहले कांग्रेस फूलपुर से मोहम्मद कैफ को टिकट दे चुकी है। साथ ही मोहम्मद अजहरुद्दीन को इस बार सवाई माधोपुर-टोंक सीट से मौका दिया गया है। देखना दिलचस्प होगा कि ये सभी बल्लेबाज कांग्रेस के लिए सियासी छक्के लगा पाएंगे या नहीं।