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मोदी के खिलाफ जुटेंगे कांग्रेस-तृणमूल

Sun, 14 Dec 2014 11:15 AM IST
एम संजय, एजेंसी, ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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अपने एक मंत्री की शारदा घोटाले में गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आग उगलने शुरू कर दी है। साथ ही ममता मोदी सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस के करीब आने में भी जुट गई हैं। केंद्र सरकार को घेरने की शुरुआत संसद से हो भी चुकी है। सोमवार को तृणमूल सीबीआई के कथित दुरुपयोग के मुद्दे को लेकर संसद भवन परिसर में प्रदर्शन करेगी तो कांग्रेस भी मोदी सरकार के छह महीने में जनता के साथ वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए संसद में आवाज बुलंद कर सकती है।
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शारदा चिट फंड घोटाले को लेकर कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस का बचाव करने में परहेज कर रहा है। बंगाल की कांग्रेस इकाई इस मामले को लेकर बंगाल सरकार को लगातार घेर रही है। इस मामले के संवेदनशील होने के चलते कांग्रेस का आलाकमान नहीं चाहता कि वह ममता के करीब दिखे। मगर दूसरे मसलों के बहाने कांग्रेस ममता बनर्जी का साथ लेकर संसद में मोदी सरकार को घेरने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती।

तृणमूल कांग्रेस के नेताओं पर कसते सीबीआई के शिकंजे को देखते हुए भी कांग्रेस का साथ पाने की तृणमूल कांग्रेस को सख्त जरूरत है। अगले हफ्ते दोनों पार्टियां संसद में देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और आगरा में धर्मांतरण के मुद्दे और पेट्रोलियम-डीजल के दाम नहीं घटाने को लेकर मोदी सरकार को घेरने के लिए एकजुट होगी। इन दोनों मुद्दों पर संसद में चर्चा होनी है।
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खुलकर केंद्र के विरोध में आईं ममता

शारदा चिटफंड घोटाले में मंत्री की गिरफ्तारी से भड़कीं ममता बनर्जी ने पीएम नरेंद्र मोदी की गिरफ्तारी की मांग है। मंत्री को हटाने की मांग खारिज करते हुए गिरफ्तारी के विरोध में शनिवार को रैली में पहुंची मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि फोटो सबूत हैं और इससे अपराध साबित होता है तो पीएम को सहारा घोटाले के लिए गिरफ्तार करना चाहिए। उन्हें रैली में मोबाइल स्क्रीन पर सहारा प्रमुख और पीएम मोदी की एकसाथ फोटो दिखाते हुए यह मांग की।

उन्होंने कहा कि कई माकपा नेताओं के चिटफंड मालिकों के साथ फोटो हैं लेकिन सीबीआई ने उन्हें नहीं गिरफ्तार किया। ममता ने कहा कि सोमवार से संसद में इसके खिलाफ टीएमसी के सांसद प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा, ‘सीबीआई अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है। भाजपा की साजिश के खिलाफ टीएमसी के सांसद प्रदर्शन करेंगे। रैली में मैं सीएम के रूप में नहीं बल्कि एक आम नागरिक के रूप में आई हूं।’ भाजपा को हद में रहने की चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि मंत्री को गवाह के तौर पर बुलाया गया था और सीबीआई ने दिल्ली से फोन आने के बाद गिरफ्तार किया।

चेतावनी देते हुए कहा कि तब क्या होगा जब हम उनकी (भाजपा नेता) गिरफ्तारी शुरू कर देंगे। उन्होंने कहा कि दंगा गुरु आज दिल्ली में सत्ता में बैठे हैं लेकिन बंगाल में उनकी मनमानी नहीं चलेगी। सीबीआई का प्रयोग राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। इधर, भाजपा ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई के आरोपों को खारिज किया है। भाजपा सांसद और प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा, ‘यदि ममता बनर्जी ने कुछ गलत नहीं किया है तो वे क्यों परेशान हैं? यदि घोटाले से उनका वास्ता होगा तो उसकी जांच होगी और सीबीआई पूछताछ करेगी। इसका फैसला जांच एजेंसी करेगी।’

पेशी पर लाए गए मंत्री पर बरसाए गए फूल
शारदा चिटफंड मामले में गिरफ्तारी के बाद शनिवार को अलीपुर कोर्ट में पेशी के लिए लाए गए ममता बनर्जी के मंत्री मदन मित्रा के समर्थन में जमकर प्रदर्शन हुआ। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने मंत्री को कोर्ट लाने वाले सरकारी वाहन पर फूल बरसा कर समर्थन व्यक्त किया। इस बीच कोर्ट ने मित्रा को चार दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है। पेशी के दौरान मित्रा ने कहा कि कल पूछताछ में सब कुछ सामान्य था लेकिन एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली से फोन आया है जिसके बाद मुझे गिरफ्तार किया गया।
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ममता, पटनायक तक पहुंच सकती है शारदा घोटाले की आंच

शारदा चिट फंड घोटाले को लेकर केंद्र सरकार और ममता बनर्जी के बीच सियासी जंग तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र पर आक्रामक रवैया अपनाकर बचने की राह निकाल रही हैं। वहीं भाजपा शारदा घोटाले के सहारे बंगाल और ओडिशा में कमल खिलाने का सपना बुन रही है। इसी के तहत केंद्र सरकार का प्रयास शारदा की आंच को ममता बनर्जी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक तक पहुंचाने का है। हालांकि पटनायक को चुप्पी साधने का बेशक अभी इनाम मिल रहा है लेकिन जांच की आंच देर-सबेर उन तक भी पहुंचेगी। बताया जा रहा है कि ममता को आक्रामक रुख दिखाने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

तृणमूल सांसद कुणाल घोष के बाद ममता सरकार के परिवहन मंत्री मदन मित्रा की गिरफ्तारी को तृणमूल प्रमुख तक पहुंचने का रास्ता माना जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि जल्द ही सीबीआई की जद में तृणमूल के और नेता आएंगे। तृणमूल के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा है कि यह पूरी तरह से बदले की भावना से की गई राजनीतिक कार्रवाई है। ठीक वैसे ही जैसा कि जुलाई 2010 में अमित शाह को गिरफ्तार कर 68 दिनों तक हिरासत में रखा गया था। भाजपा राजनीतिक तौर पर तृणमूल को नहीं हरा सकती है। इसलिए वह असंवैधानिक, अनैतिक और अलोकतांत्रिक रास्तों का सहारा ले रही है।

दूसरी ओर भाजपा ने तृणमूल के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पश्चिम बंगाल के भाजपा प्रभारी सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा है कि सीबीआई की जांच सरकार के नहीं बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत हो रही है और जब सर्वोच्च न्यायालय ने जांच का आदेश दिया तब केंद्र में भाजपा की सरकार नहीं थी।
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