कांग्रेस में चुनावी बहस को सांप्रदायिक बनाम धर्मनिरपेक्ष बनाने की होड़ ऐसी लगी है कि पार्टी ने इस बार भाजपा और आईएसआई को एक ही पाले में खड़ा कर दिया है।
कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने पार्टी के आधिकारिक मंच से कहा कि जब भी देश में दंगे होते हैं तो दो लोग खुश होते हैं। एक पाकिस्तान की आईएसआई और दूसरे भारत में भाजपाई। उन्होंने कहा कि दंगों से ध्रुवीकरण होता है, जिसका भाजपा फायदा उठाती है।
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यहां तक कि शकील अहमद ने दिल्ली के 84 के सिख विरोधी दंगों समेत कांग्रेस शासन में हुए दंगों को गुजरात दंगों से अलग बताया है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली के दंगे और गुजरात दंगों में अंतर था। गुजरात में जिस व्यक्ति पर दंगे रोकने की जिम्मेदारी थी, उसी पर दंगे करवाने का आरोप है। जबकि दिल्ली में दंगों के समय घर में मां का शव रखे रहने के बावजूद राजीव गांधी दिल्ली की सड़कों में इसे काबू करने के लिए घूम रहे थे।
लेकिन उस समय राजीव गांधी के दंगों को लेकर एक विवादित बयान की याद पत्रकारों ने दिलाई, तो शकील अहमद बगले झांकते दिखे। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में दंगे भड़कने को लेकर राजीव गांधी ने उस समय कथित तौर पर कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो जमीन हिलती ही है।