डीएलएफ के साथ हुए सौदे में राबर्ट वाड्रा को क्लीन चिट दिए जाने पर अरविंद केजरीवाल ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और बीजेपी भाई-भाई हैं, जांच तो बस लीपापोती है।
केजरीवाल ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार राबर्ट वाड्रा और भाजपा अध्यक्ष नीतिन गडकरी को बचाने में लगी हुई है। दोनों दलों के बीच आपसी सहमति बन गई है और जांच के जरिए केवल लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है।
उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि राबर्ट वाड्रा और नीतिन गडकरी की देश में जहां-जहां पर जमीनें हैं, जिन कंपनियों में जितने शेयर हैं और उनकी कुल संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए। केजरीवाल ने वाड्रा के खिलाफ जांच के नतीजे को खारिज करते हुए कहा कि यह तो होना ही था। अगर वाड्रा को क्लीन चिट नहीं मिलती तो देश हैरान हो जाता।
उन्होंने कहा कि आयकर विभाग नितिन गडकरी के खिलाफ जांच कर रहा है। उसे एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपनी चाहिए, लेकिन आयकर विभाग के पास इस जांच को करने का कोई प्रावधान ही नहीं है।
इसका अर्थ यह है कि सरकार लोगों के आंखों में धूल झोंक रही है। आयकर अधिनियम के धारा 132 के तहत छापा, 113 ए के तहत सर्वे और धारा 143 के तहत जांच किया जा सकता है। सरकार इनमें से किस नियम के तहत गडकरी के खिलाफ जांच कर रही है यह जनता को बताए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या गडकरी पर जांच या सर्वे से आयकर विभाग को कुछ हासिल भी होगा?
उन्होंने कहा कि शीला दीक्षित सरकार के खिलाफ बिजली और पानी पर उनका सत्याग्रह जारी रखेगा क्योंकि भाजपा और कांग्रेस बिजली कंपनियों से मिले हुए हैं। उन्होंने लोगों से इसका समर्थन करने की अपील भी की।
गौरतलब है कि हरियाणा के उपायुक्तों को राबर्ट वाड्रा के जमीन सौदों में कोई अनियमितता नहीं मिली है। चार उपायुक्तों के पैनल ने वाड्रा को क्लीन चिट दी है। इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन को भेजी अपनी रिपोर्ट में उपायुक्तों ने कहा है कि जमीन सौदों की रजिस्ट्री सरकारी सर्किल रेट के मुताबिक ही हुई है और इनमें राजस्व की कोई हानि नहीं हुई।