गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निशाना बनाए जाने के ठीक एक दिन बाद केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यकों को छात्रवृत्ति नहीं देने के राज्य सरकार के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट में कड़ा विरोध जाहिर किया है।
केंद्र ने कहा है कि 2002 के सांप्रदायिक दंगों के बाद अलग-थलग पड़ गए गुजरात के मुसलमानों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए अल्पसंख्यक छात्रों को वजीफा दिया जाना जरूरी है।
गुजरात में मुस्लिमों की हालत बेहतर होने के राज्य सरकार के दावे को सिरे से नकारते हुए केंद्र कहा है कि सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के मुसलमान, राज्य के अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों से भी ज्यादा गरीब हैं।
प्रदेश सरकार का यह कहना गलत है कि धर्म के आधार पर प्रधानमंत्री प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति नहीं दी जा सकती।
केंद्र ने कहा है कि सरकार की कल्याणकारी योजना का लाभ अल्पसंख्यकों को धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि एक विशेष समूह के तौर पर दिया गया है। नागरिकों के समूह को विशेष श्रेणी में रखकर उन्हें छात्रवृत्ति का लाभ दिया गया है।
विकास की दौड़ में यह समूह राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। अनुसूचित जाति, जनजाति और अति पिछड़ा वर्ग के लिए इस तरह की योजनाएं पहले से हैं। लेकिन यह सुनिश्चित किया गया है कि वंचित वर्ग के सदस्य को एक से अधिक योजना का लाभ न मिले।
याद रहे कि सर्वोच्च अदालत में केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका पर हलफनामा दायर कर विरोध जाहिर किया।
केंद्र ने कहा है कि गुजरात सरकार एक तरफ योजना को असंवैधानिक बता रही है। जबकि दूसरी तरफ यह भी कह रही है कि वह प्री-मैट्रिक कक्षाओं में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति दे रही है।
संविधान के अनुच्छेद 15(1) के तहत समाज के पिछड़े वर्ग के कल्याण के लिए इस तरह की योजनाओं को लागू किया जा सकता है। मंत्रालय का कहना है कि कमजोर अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति देने की योजना तीन राज्यों को छोड़कर सभी ने लागू कर दी है।
गुजरात के अलावा दोनों प्रदेशों के पास राज्य में आदिवासियों की बड़ी आबादी होने के कारण इस योजना की कोई सार्थकता नहीं होने को आधार है।
केंद्र ने मंडल आयोग के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले का जिक्र करते हुए कहा है कि यदि एक समुदाय की अधिसंख्य आबादी सुविधाओं से वंचित है तो उस समूची जाति या बिरादरी के लाभ के लिए कल्याणकारी योजनाएं लागू की जा सकती है।
हलफनामे में कहा गया है कि सच्चर कमेटी ने अल्पसंख्यकों की आर्थिक और सामाजिक हालात का जायजा लेने के लिए 13 राज्यों का दौरा किया था। इनमें गुजरात भी शामिल है।
राज्य सरकार का दावा कि गुजरात में अल्पसंख्यकों की स्थिति अन्य राज्यों से बेहतर है, बिना किसी आधार के कही गई है। इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है।
केंद्र की योजना:
छात्रों को वजीफा देने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्हीं अल्पसंख्यक छात्रों को वजीफा दिया जाएगा जिनके माता-पिता की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम है और जिन्होंने परीक्षा में 50 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। 30 प्रतिशत छात्रवृत्ति लड़कियों के लिए है।