श्रीनगर के शालीमार मुगल गार्डन के भीतर शुक्रवार शाम जहां जुबिन मेहता अपने 100 सदस्यों से भी बड़े दल के साथ एक शानदार स्टेज पर, जलती-बुझती रोशनी के नीचे रिहर्सल कर रहे थे, उन्हें शायद इस बात का अंदाजा था कि सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षित इस जगह के बाहर कई लोग उनके कश्मीर आने से खुश नहीं हैं।
एक विदेशी पत्रकार ने जब उनका विरोध कर रहे स्थानीय लोगों के बारे में उनसे पूछा तो उनके चेहरे के भावों को देखकर ऐसा लगा कि शायद वो उस सवाल से बहुत खुश नहीं थे और अपना आपा बरकरार रखने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन जब और पत्रकार उनकी ओर आने लगे तो जुबिन मेहता साफ नाखुश दिखे।
जब मैंने उनसे बातचीत के लिए पांच मिनट का वक्त मांगा, तो उनका जवाब था, मेरे पास एक घंटा है लेकिन मैं आपसे बात नहीं करना चाहता।
क्या वो सवालों से नाराज थे या फिर पत्रकारों की भीड़ से या फिर उन्हें सचमुच कहीं जाना था, ये साफ नहीं था। लेकिन जिस माहौल में जुबिन मेहता का ये संगीत कार्यक्रम हो रहा है उसे लेकर अलग-अलग बात सुनने को मिल रही है।
विरोध के स्वर
कई लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि ऐसे माहौल में जब कुछ हफ्ते पहले भारत और पाकिस्तान एक दूसरे पर सैनिकों को मारने का आरोप लगा रहे थे और अफजल गुरू की फांसी के बाद कश्मीर में लोगों ने प्रदर्शन किए थे, वहां इस कार्यक्रम को आयोजित करने का क्या औचित्य था।
शालीमार गार्डन के बाहर भरी रहने वाली सड़क पर सन्नाटा था। इक्का दुक्का गाड़ियां ही आती जाती दिख रही थीं। दुकानें बंद थीं क्योंकि कोई भी मुसीबत मोल नहीं लेना चाहता।
आने जाने वाले युवाओं से उनका पहचान पत्र दिखाने को कहा जा रहा था। जामा मस्जिद के आसपास लोगों से बातचीत की तो विरोध के स्वर साफ दिखे। लोग नाराज थे।
एक व्यक्ति ने कहा, "भारत इस कार्यक्रम के माध्यम से साबित करना चाहता है कि कश्मीर में सब कुछ ठीक है लेकिन ऐसा नहीं है।"
हकीकत-ए-कश्मीर
जब हम अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी के घर शुक्रवार सुबह पहुंचे तो महीनों नजरबंद रहने के बावजूद उनके चेहरे पर मुस्कान थी, जैसे कह रहे हों कि मेरे नजरबंद होने के बावजूद मेरी आवाज के असर को कोई कैसे रोकेगा।
उन्होंने कश्मीर में होने वाले कथित मानवाधिकार हनन का जिक्र तो किया ही लेकिन जुबिन मेहता के इजराइल से संबंधों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इजराइल इस इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है।
अली शाह गिलानी ने जुबिन मेहता के बारे में कहा, "मेरी उनसे यही उम्मीद है कि वो इजराइल की नीतियों का पालन करने की कोशिश न करें।"
शुक्रवार को ऐसी अटकलें लग रही थीं कि जुबिन मेहता के कार्यक्रम के विरोध में कोई भारी विरोध प्रदर्शन होगा, लेकिन कुछ छुटपुट वारदातों को छोड़कर हर जगह शांति रही।
जुबिन मेहता के कार्यक्रम एहसास-ए-कश्मीर के विरोध में शनिवार को हकीकत-ए-कश्मीर कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है जिसमें कथित मानवाधिकार हनन के मुद्दों के बारे में बात होगी।
समर्थन लेकिन चिंता भी
लेकिन क्या ये कहना सही होगा कि कश्मीर में सभी लोग इस कार्यक्रम के विरोध में हैं?
एक स्थानीय युवा पत्रकार का कहना था, "ऐसा नहीं है क्योंकि संगीत कश्मीरियों के रग-रग में है और साल 2009 में पाकिस्तानी संगीत बैंड जुनून ने यहां कार्यक्रम पेश किया था।"
जुबिन मेहता के कार्यक्रम में 15 स्थानीय कश्मीरी कलाकार भी हिस्सा लेंगे।
ऐसे ही एक कलाकार ने मुझसे डरते-डरते कहा कि घाटी में बहुत सारे संगीत समारोह का समर्थन करते हैं लेकिन घाटी के हालात को देखते हुए डरते हैं। उनका परिवार चिंतित है कि शनिवार को जब इस कार्यक्रम का प्रसारण दुनिया भर में होगा तो क्या फिर उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता नहीं बढ़ जाएगी।
उधर अली शाह गिलानी ने शनिवार को घाटी बंद रखने का आह्वान किया है।
पूरे इलाके में सुरक्षा बेहद कड़ी कर दी गई है। सभी की निगाहें जुबिन मेहता के कार्यक्रम पर होगीं और साथ ही विरोध प्रदर्शनों पर भी।