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जब मोदी तालाब से पकड़ लाए जिंदा मगरमच्छ!

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गुजरात के मेहसाणा जिले के वाडनगर शहर में कुछ बच्चे खेल रहे थे। खेल-खेल में उनकी गेंद शर्मिष्ठा झील में गिर गई। इस झील में मगरमच्छों का बसेरा था। इसीलिए किसी बच्चे की उस तालाब में उतरने की हिम्मत नहीं हुई।
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उन्हीं बच्चों में से एक था नरेंद्र। नरेंद्र निडर होकर झील में उतरा और गेंद ढूंढ़ कर ला दी। सिर्फ गेंद ही नहीं, उसने मगरमच्छ के एक बच्चे को भी साथ ले लिया।

नरेंद्र ने मगरमच्छ के बच्चे को घर ले जाकर अपनी मां को दिखाया। तब उसकी मां ने उसे समझाया, 'बेटा, उसे वापस रख दो, उसकी मां परेशान हो रही होंगी।' आज्ञाकारी नरेंद्र मगरमच्छ के बच्चे को वापस तालाब ले गया और इस तरह उस बच्चे ने जानवरों से प्रेम करना सीखा।
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चायवाला, खिलाड़ी और अभिनेता भी मोदी

वो छोटा सा बच्‍चा नरेंद्र, आज के भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार नरेंद्र मोदी हैं। ये कहानी नरेंद्र मोदी के बचपन को समर्पित एक कॉमिक्स, 'बाल नरेंद्र- नरेंद्र मोदी के बचपन की कहानियां' में छापी गई 17 कहानियों में से एक है।

इस कॉमिक्स में मोदी के अनेकों रूप दिखाए गए हैं। किताब में दिखाया गया है कि किस तरह मोदी ने भारत-चीन युद्ध के दौरान वाडनगर से गुजरने वाले सैनिकों को चाय पिलाई थी।

इसके आलावा अन्य कहानियों में कहीं वो कबड्डी ‌खेलते हुए बताए गए हैं, तो कहीं नाट्य मंच के अभिनेता और जानवरों को चाहने वाले के रूप में चित्रित किया गया है। कॉमिक्स में ये विशेष ध्यान रखा गया है कि मोदी के सभी किरदार समाजसेवा करते नजर आएं।

जब बाल नरेंद्र बना समाजसवेक

कॉमिक्स में दिखाया गया है कि सूरत की तापी नदी में जब बाढ़ आई, तो बाल नरेंद्र ने पीड़ितों की मदद के लिए गांव में आयोजित मेले में टी-स्टॉल लगाकर पैसे जमा किए।

एक कहानी के अनुसार, बचपन में मोदी ने एक स्कूल की टूटी ‌दीवार बनवाने के लिए मंच पर अभिनय कर पैसे जुटाए। बाल नरेंद्र को अपने पिता दामोदरदास की सहायता करते हुए भी दिखाया गया है।

जब उसके पिता रेलवे स्टेशन पर चाय का ठेला लगाते और भीड़ बढ़ जाती, तो छोटा नरेंद्र अपने पिता की सहायता के लिए चाय बांटता और बर्तन धोता। कॉमिक्स में ‌चित्रों के माध्यम से ये भी बताया गया है कि किस तरह छोटा नरेंद्र अपनी मां की सेवा भी करता था।

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किस तरह आई ये कॉमिक्स

रानडे प्रकाशन के हमेश मोदी कहते हैं कि मोदी के करीबी अमर चित्र कथा कॉमिक्स की तर्ज पर, मोदी के बचपन पर भी एक ऐसी कॉमिक्स चाहते थे। वो कहते हैं कि कॉमिक्स को तैयार करने की जुगत छह महीने पहले शुरू हुई थी। यह अधिक लोगों तक पहुंचने का अच्छा जरिया है।

40 पन्नों की इस कॉमिक्स में रंग भरने वाले जिग्नेश गांधी कहते हैं कि इसे तैयार करने में सबसे बड़ी परेशानी ये थी कि मोदी के बचपन की सिर्फ दो ही तस्वीरें थी। जिसके आधार पर सारे चित्रों को पिरोया गया है।

रानडे प्रकाशन का कहना है कि ‌कॉमिक्स में दर्ज सभी कहानियां मोदी के जानने वालों ने बताई हैं और इन कहानियों पर खुद मोदी ने सही होने की मुहर लगाई है।
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