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शाह के वकील बनेंगे अब SC के जज

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सोहराबुद्दीन-तुलसीराम प्रजाप्रति फर्जी एनकांउटर केस में अमित शाह के वकील रह चुके उदय ललित को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया जाएगा।
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मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मेघालय के मुख्य न्यायाधीश प्रफुल्ल चंद्र पंत, गौहाटी के मुख्य न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे और झारखंड की मुख्य न्यायाधीश आर भानुमति के साथ उदय ललित के नाम को हरी झंडी दी है।

ललित को पूर्व सॉलिसटर जनरल गोपाल सुब्रह्मण्यम के स्थान पर सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया है। उल्लेखनीय है कि गोपाल सुब्रह्मण्यम ने आईबी की नकारात्मक रिपोर्ट और सरकार के विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट का जज बनने से मना कर दिया था।
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अमित शाह के वकील रह चुके हैं उदय ललित

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम में चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा समेत ज‌स्टिस एचएल दत्तू, टीएस ठाकुर, अनिल आर दवे और सीके प्रसाद शामिल थे। द हिंदु के मुताबिक, जजों के नामों को दो दिनों में कानून मंत्रालय के पास भेज दिया जाएगा।

उदय ललित ने 1983 में वकालत की शुरुआत की थी। 1986 से वह सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं।

वे पूर्व एटॉर्नी जनरल सोली जे सोराबजी के साथ 1986 से 1992 तक काम कर चुके हैं। वह कई हाई प्रोफाइल मामलों में वकील रह चुके हैं, जिसमें हवाला कारोबारी हसन अली खान के मामले समेत सोहराबुद्दीन-तुलसीराम प्रजाप्रति फर्जी एनकाउंटर केस शामिल है। 

गोपाल सुब्रमण्यम के स्‍थान पर बनाया जज

उदय ललित 2जी स्पेक्ट्रम केस में स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर भी नियुक्त किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में उनका कार्यकाल लगभग 7 वर्ष का होगा।

लल‌ित को गोपाल सुब्रह्मण्यम के स्‍थान पर जज बनाया गया है। सुब्रह्मण्यम ने मोदी सरकार के विरोध के बाद जज बनने से इनकार कर दिया था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने सर्वोच्च अदालत में जजों की नियुक्ति के लिए चार नामों की सिफारिश सरकार को भेजी थी। उसमें गोपाल सुब्रह्मण्यम का नाम भी शामिल था।

सरकार की ओर से गोपाल सुब्रह्मण्यम के नाम पर कॉलेजियम से पुनर्विचार करने को कहा गया। सरकार ने इसके पीछे कुछ नकारात्मक कारण गिनाए।

सरकार ने किया था सुब्रह्मण्यम का विरोध

सरकार के विरोध के बाद सुब्रह्मण्यम ने अपना नाम वापस ले लिया। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि न्यायाधीश के पद की एक गरिमा होती है। एक जज को शक, संदेह से परे और निष्कलंक होना चाहिए। मुझ पर लगे आरोप बेबुनियाद हैं लेकिन मैंने पद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए इसे नहीं स्वीकार करना ही सही समझा।

उन्होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्‍टिस आरएम लोढ़ा को चिट्ठी भी लिखी। गोपाल सुब्रह्मण्यम सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर मामले में एमिकस क्यूरी थे और उनकी सिफारिश पर ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए गए थे।

इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दाहिने हाथ अमित शाह को आरोपी बनाया गया था और उनके गुजरात प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी। इस मामले को ही सुब्रह्मण्यम के नाम पर सरकार की आपत्ति की एक अहम वजह माना जा रहा है।
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मुख्य न्यायाधीश जमकर बरसे थे केंद्र सरकार पर

गोपाल सुब्रह्मण्यम के मामले पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा भी केंद्र सरकार पर जमकर बरसे थे। उन्होंने सरकार के कदम को एकतरफा करार देते हुए अपनी नाराजगी जताई। साथ ही पूर्व सॉलिसिटर जनरल के नाम को अलग करने पर कार्यपालिका के रुख को अनुचित बताया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि शीर्ष न्यायपालिका इस मसले पर बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि चीफ जस्टिस के तौर पर मैंने और मेरे चार वरिष्ठ सहकर्मियों की कॉलेजियम ने चार सबसे हुनरमंद लोगों को चुना था। हमने सरकार को इन चार नामों को नियुक्त करने के लिए भेजा था। लेकिन सरकार ने एकतरफा तरीके से एक नाम अलग कर दिया।

सरकार ने अपनी सफाई में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्ति के लिए सुब्रह्मण्यम ने खुद अपना नाम वापस ले लिया जबकि उनके मामले में सत्यापन की प्रक्रिया चल रही थी। इसलिए उनका नाम आगे नहीं बढ़ाया जा सका।
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