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महाशिवरात्रि पर गंगाजल पीकर नाग ने त्यागे प्राण! उमड़ी भीड़

Wed, 18 Feb 2015 09:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमरोहा
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पिछले एक माह से यूपी के चकमजीदपुर गांव में कौतूहल का विषय बने नाग की मौत के बाद वहां लोगों ने समाधि बना दी है। दरअसल यह नाग यहां रोज ही देखा जा रहा था लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता था।
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लोग उसपर हाथ फेरते थे और जैसे-जैसे खबर फैलती गई लोगों की रोज ही नाग को देखने के लिए भीड़ जुटती जा रही थी। महाशिवरात्रि पर पूजा के लिए बने हवन कुंड में अचानक नाग मंगलवार को भी बैठ गया। लोग उस समय पूजा के लिए बैठे थे। पहले वह चढ़ाए गए गंगाजल से भरे गड्ढे में घुसा जिसे लोगों ने स्नान करना माना।

फिर कुंड में बैठ गया जिसपर गंगा जल लोगों ने डाला। लोगों का कहना है कि मुंह में जल जाते ही उसकी मौत हो गई।

आश्चर्य भरी घटना

गांव चकमजदीपुर में एक माह पहले सड़क किनारे एक बिल से नाग निकलते ग्रामीणों ने देखा था। शुरू में नाग को देखकर ग्रामीण घबरा गए थे, लेकिन नाग का रोजाना निर्धारित समय पर बिल से बाहर आना और जाना, उनको धार्मिक आश्चर्य से भरता गया। छूने पर कुछ न कहना और लोगों के हाथ से दूध पीने को लोगों ने ईश्वरीय शक्ति माना। 9 फरवरी को यहां हवन भी हुआ।

नाग के बिल से बाहर निकलने और अंदर जाने का समय निर्धारित था। महाशिवरात्रि पर्व होने के कारण विनोद नाम के एक भोले के भक्तने सोमवार की रात को बिल के सामने बैठकर पूजा पाठ शुरू कर दी। रात करीब नौ बजे नाग बिल से बाहर आया और निर्धारित स्थान पर न बैठकर हवन कुंड में बैठ गया।

मंगलवार को महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हुआ। नाग ने जलाभिषेक से गड्ढे में जमा हुए गंगाजल में बैठ गया और लोगों ने उसके मुंह में भी गंगाजल डाला। लोगों का कहना है कि कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई थी। नाग के अंतिम दर्शन को हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी और विधि विधान से उसी स्थान पर नाग की समाधि बना दी।
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जगतवीर के खेत में बनेगा शेषनाग मंदिर

गांव चकमजदीपुर निवासी जगतवीर के खेत के ठीक सामने सड़क के अंदर नाग का बिल था। सबसे पहले खेत स्वामी ने ही नाग को देखा था और नियमित रूप से बिल के बाहर दूध रखना शुरू कर दिया था। जगतवीर ने अपने खेत के एक हिस्से में शेषनाग मंदिर की स्थापना करने की ठान ली है।

क्या कहते हैं वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट
डीएफओ एवं वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट जीएस खुशारिया ने बताया कि अमूमन नाग की आयु पचास वर्ष से अधिक की होती है। नाग की आयु का पता उसकी पूंछ के आकार से लगाया जाता है। रजबपुर के गांव चकमजदीपुर में जो नाग एक माह से मौजूद था, संभवत: वह वृद्धावस्था में पहुंच गया होगा। इस कारण उसमें जहर बनाने की क्षमता कम होने के कारण वह किसी पर हमला नहीं करता था।
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