देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक (सीएमडी) पद के लिए एनडीए सरकार के दो मंत्रियों और भाजपा शासित राज्य के एक मुख्यमंत्री की सिफारिश नहीं चली।
उन्होंने अपने-अपने पसंदीदा व्यक्ति को चुनने के लिए पूरा दबाव बनाया लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सार्वजनिक उपक्रम चयन बोर्ड (पीईएसबी) को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस मामले में किसी की भी न सुनी जाए और योग्यता मानदंडों के आधार पर ही फैसला हो।
सूत्रों के अनुसार दबाव डालने वालों में केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ और ताकतवर माने जाने वाले मंत्री, एक अन्य मंत्री और उत्तर भारत के भाजपा शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री हैं। बोर्ड ने साक्षात्कार के लिए जिन 12 नामों की सूची बनाई, उसमें मंत्री के पसंदीदा अभ्यर्थी को जगह नहीं मिली। मंत्री ने तब बोर्ड के अध्यक्ष से बात की।
भाजपा शासित एक राज्य के मुख्यमंत्री ने भी अपने राज्य के कैडर के एक पूर्व आईएएस अधिकारी और बोर्ड के सदस्य से अपने एक पसंदीदा अभ्यर्थी के नाम की सिफारिश की। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम भी चलाया गया। एक अन्य मंत्री की दिलचस्पी उक्त अधिकारी में खासी थी।