कोल ब्लॉक आवंटन से जुड़े पुराने रिकॉर्ड को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष पेश करना केंद्र सरकार के लिए आसान नहीं होगा।
सर्वोच्च न्यायालय की ओर से मांगी गई इन रिकॉर्ड का ब्यौरा देने में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और कोयला मंत्रालय ने अपने हाथ लगभग खड़े कर दिए हैं, क्योंकि ब्लॉक आवंटन से संबंधित रिकॉर्ड यहां से गुम हो चुके हैं।
कोयला मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक वर्ष 2005 से पहले आवंटित कोल ब्लॉक से संबंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गुम हो गए हैं। कई दफा खोजने के बावजूद उनका पता नहीं चल पा रहा है।
हालांकि कुछ फाइलें बिखरी हुई मिली हैं, लेकिन कई मामलों में स्क्रीनिंग कमेटी के रिकॉर्ड और कंपनियों को कोल ब्लॉक आवंटन या रद्द किए जाने के कारण का पता नहीं लग पा रहा है। यह सब कुछ जब सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उजागर होगा तो आवंटन में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण यह है कि ये दस्तावेज प्रधानमंत्री कार्यालय के पास भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सरकार की मुश्किलें निश्चित तौर पर बढ़ने वाली हैं।
दूसरी ओर सीबीआई की पड़ताल को आगे बढ़ाने में भी तमाम कठिनाईयां आएंगी। सीबीआई की जांच और पारदर्शिता के मुद्दे सरकार को सवालों के घेरे में डाल सकते हैं।
मालूम हो कि इससे पहले सीबीआई यह शिकायत कर चुकी है कि कोयला मंत्रालय उन्हें जांच में सहयोग नहीं दे रहा है। मंत्रालय की ओर से सभी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इस पर सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को जमकर फटकार लगाई थी।