वैज्ञानिकों ने उन्नत दुधारू पशुओं की आवश्यकता को पूरा करने के लिए नई तकनीक के जरिए एक और क्लोन बछड़े का प्रजनन कराने में सफलता हासिल की है।
करनाल के वैज्ञानिकों ने नई हैंड गाइड क्लोनिंग तकनीक के जरिए भैंस के मेल काल्फ का जन्म कराया है।
सोमवार को करनाल के नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) में जन्मे इस बछड़े का नाम स्वर्ण रखा गया है।
एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डॉ एके श्रीवास्तव ने अमर उजाला को बताया कि नई क्लोन तकनीक से सोमवार को दोपहर 1:25 बजे जन्मा यह बछड़ा बिलकुल स्वस्थ है।
जन्म के बाद इस बछड़े का वजन 55 किलोग्राम था। बछड़ा सामान्य बछड़ों की तरह ही दूध पी रहा है। उन्होंने बताया कि इस दफा वैज्ञानिकों ने एकदम नई क्लोन तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक को घरेलू वैज्ञानिकों ने ही विकसित किया है।
उन्होंने बताया कि हैंड गाइड क्लोनिंग तकनीक का पहली दफा इस्तेमाल किया गया है, जो सफल रहा। इस सफलता के बाद अब उन्नत किस्म के दुधारू पशुओं की उपलब्धता बढ़ाना आसान हो गया है।
श्रीवास्तव के मुताबिक संस्थान के सात वरिष्ठ वैज्ञानिकों डॉ एस के सिंगला, डॉ एम एस चौहान, डॉ आर एस मलिक, डॉ पी पाल्टा, डॉ शिव प्रसाद, डॉ नरेश सिलोकर और डॉ मोनिका सैनी की टीम ने इस काम को अंजाम दिया है।
खास बात यह है कि स्वर्ण पहले के क्लोन बफैलो काल्फ के मुकाबले ज्यादा सुंदर, स्वस्थ और कई मामलों में बेहतर है।