कांग्रेस और सपा के बीच चल रही तनातनी को देखते हुए भले ही लग रहा हो कि दोनों के रिश्ते टूट की करार पर हैं लेकिन ऐसा है नहीं। हालांकि आगामी लोकसभा चुनाव की मजबूरी के चलते दोनों पार्टियों की आपसी खींचतान बदस्तूर जारी रहेगी।
दरअसल, सपा यूपीए सरकार को बदनाम करने का कोई मौका छोड़ना नहीं चाहती है। साथ ही वह केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेना चाहती है लेकिन उसे इसके लिए कोई पुख्ता वजह नहीं मिल पा रही है।
पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों का मानना है कि उसे नहीं लग रहा है कि उसके समर्थन वापस लेने से सरकार गिरेगी। यही नहीं, अभी वह अपने सिर पर यूपीए सरकार को गिराने का दाग भी नहीं लेना चाहती। इसलिए फिलहाल वह कांग्रेस के खिलाफ तल्ख रिश्तों को कायम रखने में ही फायदा देख रही है।
सोमवार को दिल्ली पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी कभी भी चुनाव के लिए तैयार है। सपा सूत्रों का कहना है कि बेनी प्रसाद वर्मा पर भले ही सपा यूपीए सरकार पर काफी आक्रामक हो और इस्तीफे का दबाव बना रही हो। मगर इस मुद्दे पर वह सरकार गिराने जैसा फैसला लेने की नहीं सोच रही है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि खुद मुलायम सिंह यादव कह रहे हैं कि सरकार गिरती दिखी तो बचाएंगे नहीं लेकिन हम सरकार खुद नहीं गिराएंगे। उधर, कांग्रेस भी सपा का समर्थन तो चाहती है मगर वह भी आगामी चुनाव में यूपी में पार्टी की हालत सुधारने के लिए सपा के खिलाफ कठोर जुबान चलाने को सियासी जरूरत मान रही है। बेनी की धुआंधार बैटिंग से कांग्रेस अंदरखाने गदगद है। दूसरी तरफ पार्टी खुद भी संसद के बजट सत्र के पहले चरण के बाद सपा के खिलाफ आक्रामक होने की तैयारी में है।