लद्दाख में चीनी घुसपैठ के विवाद को आपसी सहमति से सुलझा चुके भारत और चीन अब कारोबारी रिश्तों को मजबूती देंगे।
घुसपैठ के कारण उपजे तनाव के बीच चीन के नए प्रधानमंत्री ली केचियांग की रविवार से तीन दिवसीय भारत यात्रा का एजेंडा विशुद्ध रूप से व्यापारिक लाभ हासिल करने का होगा।
वहीं, भारत अपने व्यापारिक हितों का खयाल रखते हुए सीमा पर घुसपैठ के माध्यम से चीन की बार-बार दिखाई जा रही दादागिरी के मामले को प्रमुखता से उठाएगा।
ली रविवार दोपहर बाद दिल्ली पहुंचते ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ संक्षिप्त वार्ता करेंगे। संक्षिप्त वार्ता के बाद ली प्रधानमंत्री के रात्रि भोज में शिरकत करेंगे।
ली केचियांग के पद संभालने के बाद पहली विदेश यात्रा के लिए पहली बार भारत को चुनकर चीन ने जहां भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों में और मजबूती लाने की इच्छा का संकेत दिया है।
वहीं भारत भी चीन के इस कदम को बेहद गंभीरता से ले रहा है। विदेश मामलों के विशेषज्ञों का भी मानना है कि दोनों देशों के बीच विवादित मुद्दे तो उठेंगे, लेकिन मुख्य जोर व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर होगा।
भारत की कोशिश दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए चीनी बाजारों में भारत की पैठ बढ़ाने संबंधी समझौता करने पर होगी।
बीते वित्तीय वर्ष में दोनों देशों का व्यापार 66.47 अरब डॉलर था, मगर इसमें भारत की हिस्सेदारी 30 फीसदी से भी कम रही है।
इसलिए भारत कोशिश करेगा कि चीन अपने यहां भारत को व्यापार बढ़ाने के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराए, जिससे इस असंतुलन को पाटा जा सके।
इस मामले में चीन का रुख सकारात्मक है। लेकिन इसके बदले वह भारत के आईटी और फार्मा क्षेत्र में अपनी पैठ बनाना चाहता है।
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अमेरिका के साथ घनिष्ठ होते भारत के रिश्तों से चेतते हुए चीन की ओर से भी संबंध मजबूत बनाने के संकेत मिल रहे हैं।
ली की इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बातचीत के मुख्य एजेंडे पर चूंकि व्यापार है, इसलिए ली के साथ वहां का व्यापार एवं निवेश संवर्धन आयोग का बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी भारत आ रहा है।
इस दौरान चाइना इंडिया सीईओ फोरम और चाइना इंडिया कोओपरेशन समिट का भी आयोजन इसी उद्देश्य के तहत हो रहा है।
सूत्रों के अनुसार भारत चीन के समक्ष घुसपैठ का मामला भी उठाएगा। चीन के साथ जहां सीमा विवाद प्रमुख मुद्दा है, वहीं एशिया प्रशांत क्षेत्र के अलावा चीन की तिब्बत के निर्वासित नेता दलाईलामा को लेकर भी कुछ आपत्तियां हैं। भारत इस दौरान चीन से पाकिस्तान को मिल रही सैन्य सहायता का मसला भी उठाएगा।