बवाल के सात दिन बाद मसूरी में लगे कर्फ्यू में प्रशासन ने शुक्रवार को 12
घंटों की ढील दी। सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक बाजार खुला। इसके साथ ही
उत्तर प्रदेश के इस इलाके के स्कूल भी खुले। पिछले सात दिनों से घर में कैद
बच्चे शुक्रवार सुबह स्कूल जाते नजर आए। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि
अगर इलाके में हालात इसी प्रकार सामान्य रहा तो आगामी दिनों में कर्फ्यू
पूरी तरह से हटा लिया जाएगा।
बृहस्पतिवार को ही जिला प्रशासन ने मसूरी इलाके में सवेरे से ही कर्फ्यू
में 12 घंटों की ढील दिए जाने फैसला कर लिया था। इसी के चलते शुक्रवार को
बाजार के साथ-साथ स्कूल-कालेज भी खुल गए। हालात सामान्य होते देख लोगों ने
भी अपने बच्चों को स्कूल भेजा। लोगों ने खरीददारी भी की।
हालांकि सुरक्षा के मद्देनजर इलाके भर में पुलिस-पीएसी और आरएएफ के जवान
मुस्तैद रहे। दूसरी ओर उपद्रव काटने वालों की पहचान के लिए पुलिस ने अपनी
जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। हालांकि अधिकारी इस जांच से जुडे़ मामले को
फिलहाल उजागर नहीं कर रहे हैं। पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी अभी भी मसूरी
थाने में कैंप किए हुए हैं।
नेशनल कोआर्डिनेटर को मसूरी जाने से रोका
मसूरी जा रहे राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में ओबीसी मामलों के नेशनल
कोआर्डिनेटर डॉ. ताजुद्दीन अंसारी को शुक्रवार सुबह साढ़े दस बजे
पुलिस-प्रशासनिक अफसरों ने यूपी गेट पर रोका लिया। पुलिस उन्हें यहां से
आवास विकास परिषद के गेस्ट हाउस लाई जहां उनसे बातचीत की गई।
गेस्ट हाउस में पुलिस-प्रशासनिक अफसरों से बातचीत के बाद अंसारी ने मृतकों
के परिवारों को 20-20 लाख और घायलों कों पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा दिए
जाने की मांग की। उन्होंने उपद्रव मामले में पांच हजार लोगों पर किया
मुकदमा खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि पांच हजार की भीड़ कभी दंगा
नहीं करती। असामाजिक तत्व कुछ लोग ही होते हैं। साथ ही उन्होंने पूरे
प्रकरण की न्यायिक जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी
की।