वैसे तो मां-बाप अपने बच्चों की परवरिश करते हैं, लेकिन हाथरस के निकटवर्ती गांव सुरंगपुरा में एक घर में स्थिति बिल्कुल इसके उलट है। वहां दो बच्चे खेलने-कूदने की उम्र में अपने मां-बाप की परवरिश कर रहे हैं।
दोनों के मां-बाप अंधे हैं और ऐसी स्थिति में दोनों भीख मांगकर अपने और अपने मां-बाप का पेट भर रहे हैं। खेलने-कूदने और पढ़ने की उम्र में इनका बचपन अपने मां-बाप की परवरिश और भीख मांगने में बीता जा रहा है।
निकटवर्ती गांव सुरंगपुरा निवासी दौजीराम रिक्शा चलाकर अपना पेट पालता था। उसकी पत्नी शांति देवी अंधी थी। शांति ने दो बच्चों को भी जन्म दिया। इस बीच दौजीराम के पांव में चोट लग गई। गरीबी से उसका सही उपचार नहीं हो सका और इस चोट ने उसकी आंखों की रोशनी भी छीन ली। हालत यह हो गई पति-पत्नी दोनों ही अंधे हो गए।