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'संसद हमले में अफजल गुरु का रोल संदेहास्पद'

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और यूपीए सरकार में गृहमंत्री रहे पी. चिदंबरम ने अफजल गुरु के मुद्दे पर कुछ ऐसा कहा जिस पर विवाद हो सकता है। चिदंबरम ने कहा कि अफजल गुरु के साथ जो हुआ शायद ठीक नहीं हुआ।
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हालांकि उन्होंने ये भी जोड़ा कि सरकार में रहते हुए ऐसी बातें कहने का हक किसी को नहीं हो सकता। इसलिए फैसले के दौरान मैं इस मुद्दे पर कुछ कह नहीं सका। लेकिन ईमानदारी से कहूं तो एक सामान्य व्यक्ति के तौर पर मेरा मानना है कि अफजल केस में कोर्ट उसे थोड़ी रियायत दे सकता था।

अंग्रेजी समाचार पत्र इकोनॉमिक टाइम्स के साथ बातचीत में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'अफजल के संसद हमले में सीधे रोल पर स्थिति संदेहास्पद है। हालांकि हम ये नहीं कह सकते कि कोर्ट ने मामले को गलत ढंग से लिया है। वो भी उस समय जब सरकार ही कोर्ट में केस लड़ रही हो।'
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जेएनयू मुद्दे पर भी की टिप्पणी

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि कोर्ट अफजल गुरु को थोड़ी रियायत दी जा सकती थी। उसे बिना पेरोल के आजीवन कारावास की सजा भी कोर्ट द्वारा दिया जा सकता था।

चिदंबरम 2008 से 2012 के बीच देश के गृहमंत्री रहे। इसके बाद उन्हें वित्त मंत्री बनाया गया था। अफजल गुरु को 2001 के संसद हमले का दोषी करार दिया गया था। उसे 2013 में फांसी दी गई थी। उस समय सुशील कुमार शिंदे देश के गृहमंत्री थे।

चिदंबरम ने हाल के जेएनयू विवाद पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई अपनी राय रखता है तो ये गलत है कि उसे देश विरोधी मान लिया जाए। जेएनयू में देश विरोधी नारों को देशद्रोह नहीं माना जाना चाहिए।
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