छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयोजित नसबंदी शिविर अब भी चर्चा कि विषय बना हुआ है। इस कार्यक्रम में हुई 15 मौतों ने न सिर्फ छत्तीसगढ़ सरकार को कटघरे में खड़ा किया है बल्कि इस घटना ने दवाओं की स्थानीय स्तरीय जांच प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े किए हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक बिलासपुर के पेंडारी गांव में एक सरकारी शिविर लगाया गया था। ग्रामीणों ने दावा किया है कि शिविर में एकमात्र डॉक्टर ने अपने सहयोगी के साथ महज छह घंटे में 83 महिलाओं का ऑपरेशन कर डाला। मगर कुछ महिलाओं की ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ी और बाद में उनकी मौत हो गई। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या महज टार्गेट पूरा करने के लिए इस तरह की लापरवाही को अंजाम दिया जा सकता है।
घटना की गंभीरता को समझते हुए प्रशासन की तरफ से चार डॉक्टरों के निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया था। निलंबित होने वाले डॉक्टरो में डॉ. आरके गुप्ता समेत नसबंदी कार्यक्रम के राज्य समन्वयक केसी उरांव, ज़िले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी आरके भांगे और प्रखंड चिकित्सा अधिकारी प्रमोद तिवारी थे। गौरतलब है कि डॉ. गुप्ता को पिछले साल ही 50 हजार महिलाओं के आपरेशन करने के लिए पुरस्कृत किया गया था।
इस घटना को चंद दिन ही बीते हैं लेकिन बिलासपुर के चौक चौराहों में यह चर्चा का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।