चेक पर गलत हस्ताक्षर करना अब आपको भारी परेशानी में डाल सकता है। इस छोटी सी भूल के लिए आप पर आपराधिक मामला तक चल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि किसी व्यक्ति द्वारा जारी चेक यदि इस आधार पर खारिज हो जाता है कि उसके हस्ताक्षर बैंक के पास उपलब्ध उसके दस्तखत से मेल नहीं खाते हैं तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जा सकता है।
जस्टिस टी. एस. ठाकुर और जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि चेक के डिसऑनर होने के मामले में आपराधिक मामला तभी चलाया जा सकता है जबकि चेक जारी करने वाले के खाते में उतनी राशि न हो, जबकि हस्ताक्षर मेल न खाने के मामले में आपराधिक मामला नहीं चलाया जा सकता।
पीठ ने कहा कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत जिस तरह खाता बंद होने की सूरत में चेक डिसऑनर का मामला आता है, ठीक उसी तरह हस्ताक्षर मेल न खाने की सूरत में चेक डिसऑनर होने का मामला भी इसी धारा के तहत आता है। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि कहा कि इस तरह के मामलों में बैंक द्वारा चेक लौटाने पर खाताधारक को नोटिस दिया जाना चाहिए और उसके खिलाफ आपराधिक प्रक्रिया शुरू करने से पहले उसे राशि का प्रबंध करने का मौका दिया जाना चाहिए।