महाराष्ट्र सरकार ने जनता के दबाव और अदालत की आलोचना के आगे झुकते हुए शुक्रवार को बंबई हाईकोर्ट को सूचित किया कि उसने कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी के खिलाफ देशद्रोह का आरोप वापस लेने का फैसला किया है। त्रिवेदी पर राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान करने का आरोप है।
महाधिवक्ता डी. खंबाता ने कोर्ट को बताया कि मामले पर गौर करने से देखा जा सकता है कि आईपीसी की धारा 124 (ए) के तहत असीम पर देशद्रोह का कोई मामला नहीं बनता। इसलिए सरकार ने राष्ट्रीय प्रतीकों के कथित अपमान के मामले में त्रिवेदी के खिलाफ यह आरोप नहीं लगाने का निर्णय किया है। मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह और न्यायमूर्ति एनएम जामदार की खंडपीठ वकील संस्कार मराठे की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
मराठे ने कार्टून बनाने के लिए त्रिवेदी की गिरफ्तारी के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। त्रिवेदी को पहले ही जमानत दी जा चुकी है। अदालत के अनुसार त्रिवेदी को गिरफ्तार करना तो बुरा था ही पुलिस ने उनकी हिरासत की भी मांग की। यह ज्यादा हैरान करने वाला था। पीठ ने कहा कि अगर गिरफ्तारी नहीं होती तो उन कार्टूनों और कार्टूनिस्ट के बारे में किसी को पता भी नहीं चलता।