राजस्थान और मध्य प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र में भी बड़े पैमाने पर श्रम कानून में बदलाव होने जा रहा है। इससे उद्योगपतियों की तो चांदी हो जाएगी लेकिन कर्मचारियों और मजदूरों की जॉब सिक्योरिटी खत्म हो जाएगी।
श्रम कानून में बदलाव का जो नया मसौदा तैयार हुआ है, उसमें कंपनी मालिकों को किसी भी वक्त बिना सरकार की अनुमति के कर्मचारियों की छंटनी करने और कंपनी बंद करने का अधिकार होगा। इससे सीधे तौर पर कंपनियों को कर्मचारियों के पर कतरने का अधिकार मिल जाएगा।
राज्य में भाजपा-शिवसेना सरकार आने के बाद श्रम विभाग ने केंद्र सरकार के औद्योगिक विवाद कानून, 1947 में भारी बदलाव करने का मसौदा तैयार किया है। इसके तहत जिस कंपनी में 300 से कम कर्मचारी होंगे, उस कंपनी के मालिक को कर्मचारियों की छंटनी से लेकर फैक्ट्री बंद करने का अधिकार मिलेगा।
मध्य प्रदेश में भी जल्द मिल जाएगी नौकरी
अभी यह अधिकार उन कंपनियों के पास है, जिनके पास 100 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं। भाजपा शासित राजस्थान में यह कानून लागू है और मध्य प्रदेश में इसे जल्द ही हरी झंडी मिलने वाली है।
हालांकि, राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस कानून का ज्यादा असर नहीं होगा लेकिन महाराष्ट्र में इस कानून के बनने के बाद कर्मचारियों के हित पूरी तरह से कंपनी मालिकों के यहां गिरवी हो जाऐंगे।
श्रम विभाग के अधिकारियों की दलील है कि इससे कंपनियों को घाटे से उबरने में मदद मिलेगी और कर्मचारियों के अनावश्यक बोझ से भी छुटकारा मिल सकेगा, जबकि मजदूर संगठन इसके विरोध में हैं। यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो राज्य की 41 हजार कंपनियों में से 39 हजार कंपनियों को कर्मचारियों की छंटनी और कंपनी बंद करने के लिए सरकार से अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
देश का सबसे बढ़ा औद्योगिक राज्य है महाराष्ट्र
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा औद्योगिक राज्य है और देश की कुल उत्पादित आय में सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र का ही है। वित्तीय वर्ष सन् 2013-14 में राज्य की औद्योगिक डीजीपी 2,267 अरब, गुजरात की 1500 अरब और तमिलनाडु की 1200 अरब थी।
अदाणी-अंबानी के लाभ के लिए हो रहा है कानून में बदलाव
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) महाराष्ट्र के अध्यक्ष जय प्रकाश छाजेड़ ने श्रम कानून में बदलाव को मजदूर विरोधी बताते हुए भाजपा सरकार पर अदाणी और अंबानी जैसे उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि नए श्रम कानून में अप्रेंटिस के तहत कर्मचारियों को छह महीने से लेकर एक साल तक काम पर रखा जाएगा, लेकिन उन्हें वेज बोर्ड का लाभ नहीं दिया जाएगा। इस श्रम कानून से बेरोजगारी बढ़ेगी।
इंडस्ट्री फ्रेंडली नहीं है देश की मजदूर यूनियनें: माधव भंडारी
महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता माधव भंडारी श्रम कानून में बदलाव के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहते हैं कि काफी समय से इसमें बदलाव की बात चल रही है। दरअसल, देश की मजदूर यूनियनें इंडस्ट्री फ्रेंडली नहीं हैं। उसकी वजह से देश में इंडस्ट्री बढ़ाने का माहौल नहीं बन पा रहा है, इसलिए श्रम कानून में सुधार आवश्यक हो गया है और राज्य सरकार इस पर काम कर रही है।