तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने घोषणा कर दी है कि वह आगामी लोकसभा चुनावों में यूपीए और एनडीए के विकल्प के रूप में देखे जा रहे फेडरल फ्रंट में शामिल होंगे।
हालांकि उनकी इस घोषणा से खुद उन्हीं की पार्टी के सीनियर सदस्य हैरान हैं क्योंकि तीसरे मोर्चे का आइडिया पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का है, जो कि वामपंथी पार्टी की धुर विरोधी है।
जबकि टीडीपी और वामपंथी दलों में लंबे समय से बेहतर रिश्ते हैं। बावजूद इसके नायडू ने कहा, ‘सौ फीसदी हम फेडरल फ्रंट से जुड़ेंगे।’
नायडू ने कहा कि यूपीए अपना जनाधार खो चुकी है और कांग्रेस काफी कमजोर हो गई है। भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए भी कुछ अच्छा नहीं कर पा रहा है। दूसरी ओर क्षेत्रीय दल काफी मजबूती के साथ उभर रहे हैं।
अगले लोकसभा चुनावों में क्षेत्रीय दल ही प्रमुख भूमिका निभाएंगे। ऐसे में सभी क्षेत्रीय दलों की जिम्मेदारी बनती है कि यूपीए और एनडीए के अलावा तीसरा विकल्प जनता के सामने रखे। इसलिए हम निश्चित तौर पर फेडरल फ्रंट का हिस्सा बनेंगे।
उन्होंने पुराना इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि केंद्र में कांग्रेस के बिना बनी चार में से तीन सरकार में टीडीपी ने अहम भूमिका निभाई है। 2014 में भी हम मुख्य भूमिका अदा करेंगे।
हालांकि नायडू की घोषणा से उनकी पार्टी के सीनियर नेता हैरान हैं। टीडीपी की पोलित ब्यूरो के एक सदस्य ने कहा कि अभी तक हमसे किसी ने संपर्क नहीं किया है और यह आइडिया भी सिर्फ एक ही दिन पुराना है।
पार्टी में इसे लेकर अभी कोई चर्चा भी नहीं हुई, ऐसे में यह फैसला हैरान करने वाला है। टीडीपी नेता अब लेफ्ट पार्टियों की टिप्पणी का इंतजार कर रहे हैं।
ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन्हें सुलझाने में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही नाकाम रही हैं। अब वक्त आ गया है कि देश में तीसरे मोर्चे की सरकार बने।--अखिलेश यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
तीसरे मोर्चे जैसी कोई बात नहीं है। यदि श्रेत्रीय दल मिलकर केंद्र में गैर कांग्रेस और गैर भाजपा सरकार बनाते हैं तो हम उसका समर्थन करेंगे।--एचडी देवगौड़ा, जदएस प्रमुख
क्षेत्रीय दलों की जिम्मेदारी है कि वे यूपीए और एनडीए के विकल्प के तौर पर तीसरा मोर्चा तैयार करें। इसलिए हम निश्चित तौर पर फेडरल फ्रंट का समर्थन करेंगे।--चंद्रबाबू नायडू, टीडीपी