फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुर्सी और मकान नहीं छोड़ना चाहते नेता?

Sun, 10 Aug 2014 06:51 PM IST
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
कुर्सी का तो सबको पता था, पर नेता मकान भी नहीं छोड़ना चाहते। शहरी विकास मंत्रालय को ऐसे सांसदों और पूर्व मंत्रियों से मकान खाली करवाने में मशक्कत करनी पड़ रही है जो चुनाव हार चुके हैं लेकिन मकान खाली नहीं करना चाहते।
विज्ञापन


विभाग के निदेशक के अनुसार रोज़ तीन टीमें इन पूर्व सांसदों और मंत्रियों के घरों पर जातीं हैं और उन्हें खाली करने की गुज़ारिश करती हैं।

ऐसे 16 पूर्व मंत्रियों सहित 265 पूर्व सांसदों को नोटिस पर नोटिस भेजे जा रहे हैं और वो सरकारी मकानों में जमे हैं। सरकारी रिहाइश न मिल पाने से 300 से ऊपर नवनिर्वाचित सांसदों को होटलों में रहना पड़ रहा है।

मकान न छोड़ने वालों में सिर्फ नेता नहीं। इनमें पूर्व नौकरशाह भी हैं।

इस बार संसद में 320 नए सदस्य

मौजूदा लोकसभा में 320 सदस्य पहली बार चुनकर आए हैं। इनमें से बहुतों के रहने का अभी तक कोई पुख्ता इंतज़ाम नहीं हो पाया है। उनके लिए दिल्ली के विभिन्न होटलों में रहने का इंतज़ाम किया गया है।

वजह यह है कि पिछली लोकसभा के 265 पूर्व सांसदों ने अभी तक अपने सरकारी मकान खाली नहीं किए हैं। इनमें 16 पूर्व मंत्री हैं।

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने लोकसभा को बताया कि इन सरकारी मकान खाली न करने वालों पर 20 लाख रुपए से ज़्यादा हर्जाना बकाया भी है।

बड़े-बड़े नाम

सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब शहरी विकास मंत्रालय ने दावा किया है कि उसने मकान खाली कराने का काम शुरू कर दिया है।

सबसे ऊपर कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा की चर्चा है, जिनके नाम से नौ सरकारी मकान आवंटित हैं। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने भी अपना सरकारी मकान खाली नहीं किया है।

शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू ने 30 जुलाई को लोकसभा में कहा कि इस फेहरिस्त में जयपाल रेड्डी, अजीत सिंह, कपिल सिब्बल, बेनी प्रसाद वर्मा, डॉ. गिरिजा व्यास, एमएम पल्लम राजू, कृष्णा तीरथ, श्रीकांत कुमार जेना, सचिन पायलट, जितेंद्र सिंह और फारुक अब्दुल्ला के नाम शामिल हैं। इनमें सबसे ज़्यादा अकेले दो लाख 43 हज़ार 678 रुपए जयपाल रेड्डी पर बकाया हैं।

नियमों के खिलाफ

सूचना के अधिकार के लिए काम करने वाले कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल का कहना है कि जाते-जाते पिछली यूपीए सरकार ने 59 ऐसे लोगों को सरकारी मकान आवंटित किए, जो न सांसद रहे न मंत्री।

वो कहते हैं कि मकान खाली करना तो एक तरफ़, कई ऐसे नेता हैं, जो अस्थायी रूप से बंगलों में रह रहे थे और उनके नाम से उन बंगलों का स्थायी आवंटन कर दिया गया है।

उनके अनुसार कई सामाजिक ट्रस्टों के नाम पर भी सरकारी मकानों का आवंटन किया गया, जो नियमों के खिलाफ है।

लोकसभा में उठाया गया मुद्दा

लोकसभा में यह मुद्दा उठाने वाले बिहार से भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के मुताबिक़ इतने वरिष्ठ नेताओं से मकान जबरन खाली नहीं कराया जा सकता।

नेताओं को खुद ही सरकारी मकान खाली कर देने चाहिए। उनका कहना है कि अगर कोई वाकई बीमार है तो अलग बात है। मगर बीमारी का बहाना बनाकर मकान कब्जे में रखना गलत है।

हुकुमदेव के साथ यह मामला उठाने वाले हिमाचल प्रदेश से सांसद अनुराग ठाकुर कहते हैं कि नए सांसदों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों से आए लोगों से मिलने में भी परेशानी हो रही है।
विज्ञापन

नोटिस

शहरी विकास मंत्रालय का कहना है कि ऐसे सभी लोगों को पहले ही नोटिस भेजे जा चुके थे। अब मकान खाली कराने के लिए विशेष टीमें बनाई गई है।

विभाग के निदेशक ए एस राव कहते हैं कि कुछ मकान खाली करा दिए गए हैं और कुछ को खाली कराने का काम चल रहा है। 16 पूर्व मंत्रियों को भी विभाग ने नोटिस भेजा है।

मंत्रालय के 'रियासत विभाग' ने तीन अलग-अलग टीमें बनाई हैं, जो लोगों से मकान खाली करने की गुज़ारिश करती हैं।

भारत के पूर्व महालेखा परीक्षक विनोद राय ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसके बाद सर्वोच्च अदालत ने सरकार को नोटिस जारी किया है। माना जा रहा है कि ऐसे मकान शायद जल्द खाली करा लिए जाएंगे पर उन मकानों को लेकर विवाद लंबा चल सकता है, जो जाते-जाते यूपीए सरकार ने सामाजिक ट्रस्टों को आवंटित कर दिए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें